दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणी: आज मोबाइल और माइक लेकर कोई भी खुद को पत्रकार बता सकता है

By: The Trek News Desk

दिल्ली हाईकोर्ट ने डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि आज के समय में केवल मोबाइल फोन और माइक्रोफोन के सहारे कोई भी व्यक्ति ख़ुद को पत्रकार या रिपोर्टर घोषित कर सकता है. अदालत ने कहा कि ऐसे कई लोग बिना किसी औपचारिक पत्रकारिता प्रशिक्षण, नैतिक मानकों या जवाबदेही के रिपोर्टिंग करने का दावा करते हैं.

यह टिप्पणी न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया ने 16 जुलाई को उस मामले की सुनवाई के दौरान की, जिसमें दो लोगों को ज़मानत दी गई. इन पर दिल्ली के सीमापुरी क्षेत्र में एक यूट्यूब चैनल के लिए काम कर रहे दो फ्रीलांस रिपोर्टरों के साथ कथित मारपीट का आरोप है.

अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, यह घटना 4 जुलाई 2025 की है. दोनों फ्रीलांस रिपोर्टर सीमापुरी में कथित तौर पर बिना अनुमति बने एक धार्मिक स्थल की वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे. इस दौरान स्थानीय लोगों ने विरोध जताया और स्थिति तनावपूर्ण हो गई. आरोप है कि गुस्साई भीड़ ने दोनों रिपोर्टरों का पीछा किया. जान बचाने के लिए वे एक बस में सवार हो गए, लेकिन कुछ लोग बस में भी घुस गए और उनके साथ मारपीट की.

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यह मामला भीड़ के गुस्से का प्रतीत होता है और दोनों आरोपियों की भूमिका पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. इसी आधार पर अदालत ने उन्हें ज़मानत देने का फैसला सुनाया.

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि रिपोर्टरों पर हमला प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला माना जाना चाहिए. हालांकि अदालत ने इस तथ्य का उल्लेख किया कि दोनों शिकायतकर्ता किसी मान्यता प्राप्त समाचार संस्थान से जुड़े नहीं थे, बल्कि एक यूट्यूब चैनल के लिए फ्रीलांस आधार पर काम कर रहे थे.

न्यायमूर्ति कठपालिया ने यह भी कहा कि मामला संवेदनशील होने के बावजूद रिपोर्टरों ने मौके पर रिपोर्टिंग शुरू करने से पहले स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी नहीं दी. हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि इससे किसी भी प्रकार की हिंसा या हमले को उचित नहीं ठहराया जा सकता.

अपने आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि हाल के वर्षों में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के तेज़ी से विस्तार के कारण मीडिया का एक बड़ा हिस्सा असंगठित और लगभग बिना किसी नियमन के काम कर रहा है.

अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि कई स्वयंभू रिपोर्टर लोगों के सामने अचानक माइक रखकर तत्काल जवाब देने का दबाव बनाते हैं. यदि कोई व्यक्ति जवाब देने से इनकार करता है या चुप रहना पसंद करता है, तो कैमरे के सामने यह कह दिया जाता है कि वह सवालों से बच रहा है. अदालत के अनुसार, ऐसी प्रवृत्ति से जनता के बीच भ्रामक संदेश जाता है और संबंधित व्यक्ति पर अनावश्यक सामाजिक दबाव बनता है.

Source: News Agencies

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *