मेरठ में शुरू हुआ 37वीं अखिल भारतीय प्राणीशास्त्र कांग्रेस का तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन

By: प्रेरणा भारती

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के अटल सभागार में “37वीं अखिल भारतीय प्राणीशास्त्र कांग्रेस (AICZ-2026)”और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ हो गया. तीन दिवसीय यह आयोजन 7 से 9 अप्रैल 2026 तक चलेगा. सम्मेलन का मुख्य विषय है, “Advances in Scientific Research for the Health and Well-being of Man & His Livestock: Nutritional Security and Sustainable Future”.

”सीसीएसयू प्राणीशास्त्र विभाग और ज़ूलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया” के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन में देश-विदेश के प्रख्यात वैज्ञानिक, शोधकर्ता और शिक्षाविद् भाग ले रहे हैं.

माननीय कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला की मुख्य संरक्षकता में कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन और वंदना से हुई. मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. आर.सी. सोबती, जेडएसआई अध्यक्ष प्रो. बी.एन. पांडेय, डीन साइंस प्रो. हरे कृष्णा, डायरेक्टर रिसर्च प्रो. बीरपाल सिंह और जम्मू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. उमेश कुमार राय मौजूद रहे.

आयोजन संयोजक प्रो. बिन्दु शर्मा ने सभी गणमान्य अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए सम्मेलन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला.

मुख्य अतिथि प्रो. आर.सी. सोबती ने “महामारी स्वरूप एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस से मुकाबला करने में बायोटेक्नोलॉजी की भूमिका” विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया. उन्होंने बताया कि आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी दवाओं के बढ़ते प्रतिरोध को कैसे नियंत्रित कर सकती है.

सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई:

– प्रो. रीता सिंह: महिलाओं में PCOS के प्रबंधन की चुनौतियां और चिंताएं

– प्रो. डॉ. पापिया मंडल: नगरपालिका ठोस अपशिष्ट कंपोस्ट का चरित्रांकन और परिपत्र अर्थव्यवस्था में उसकी भूमिका

– डॉ. रजत भार्गव: भारत में फिन्स और वीवर पक्षियों (Ploceus megarhynchus) का केस स्टडी – विलुप्ति को रोकना या निर्धारित करना

– डॉ. सुनयना: एआई और रिमोट सेंसिंग के माध्यम से पर्यावरणीय प्रणाली की निगरानी

– प्रो. राकेश पांडेय: C. elegans मॉडल प्रणाली का उपयोग कर फाइटोमॉलिक्यूल्स का फार्मास्यूटिकल एवं न्यूट्रास्यूटिकल मूल्यांकन

– डॉ. ए.के. सिंह: जलीय आक्रमण – मत्स्य पालन और पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता के लिए खतरा

– प्रो. शोकूफेह शम्सी (ऑनलाइन, अंतरराष्ट्रीय): वन हेल्थ फ्रेमवर्क में खाद्य जनित परजीवियों का अदृश्य जोखिम

यह आयोजन जंतु विज्ञान और जीव विज्ञान के उभरते रुझानों, नवाचारों तथा शोध सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हो रहा है. पोषण सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास से जुड़े मुद्दों पर गहन चर्चा हुई.

सम्मेलन के दौरान शोध पत्र प्रस्तुतियां, पोस्टर सत्र और विशेष चर्चाएं भी आयोजित होंगी. यह कार्यक्रम ज्ञान विनिमय और वैज्ञानिक सहयोग की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है.

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