By: प्रेरणा भारती
मेरठ जनपद के ग्राम गाज़ीपुर में शुक्रवार को सर्वसमाज की आपातकालीन बैठक आयोजित की गई, जिसमें हालिया “तेजगढ़ी प्रकरण” में पुलिस की एकतरफा कार्रवाई की कड़ी निंदा की गई. ग्रामीणों ने तीन निर्दोष युवकों-हैप्पी भड़ाना, सुबोध यादव और आयुष शर्मा को बिना ठोस सबूत के जेल भेजने पर गुस्सा जताया, जबकि मुख्य आरोपी विपुल चपराना को जल्द ज़मानत मिल गई.
बैठक में उपस्थित सामाजिक प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई प्रभावशाली व्यापारिक वर्गों और भाजपा नेताओं के दबाव में की गई है. पुलिस ने धारा 308 जैसी गंभीर धाराएं अनुचित तरीके से जोड़ीं, जिससे निर्दोषों के अधिकारों का हनन हुआ और पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए.
बैठक की अध्यक्षता पवन गुर्जर ने की, जबकि संचालन एडवोकेट आदेश प्रधान ने किया. सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि आगामी रविवार को ग्राम काज़ीपुर में सर्वसमाज की बड़ी सामाजिक पंचायत होगी, जहां प्रशासन की कार्यशैली के खिलाफ सामूहिक निर्णय लिए जाएंगे और निर्दोष युवकों की तत्काल रिहाई की मांग की जाएगी.
सर्वसमाज ने पुलिस से मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच उच्च स्तरीय अधिकारी या विशेष जांच टीम (SIT) से कराई जाए. जांच पूरी होने तक किसी निर्दोष पर सख्त कार्रवाई न हो. साथ ही, शराब के नशे में उत्पात मचाने वाले सत्यम रस्तोगी और उसके सहयोगी सिद्धार्थ बाबू (रजिस्ट्री ऑफिस, मेरठ) की मेडिकल रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और उन पर भी समान कानूनी कार्रवाई हो.
उपस्थित समाजबंधुओं ने चेतावनी दी कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो रविवार की पंचायत से व्यापक जन आंदोलन शुरू किया जाएगा.
प्रमुख जारीकर्ता: पवन गुर्जर, आदेश प्रधान, अनुज भड़ाना, जयराज चपराना, इशू भड़ाना, भारत भड़ाना, राजकुमार डेडव, नकुल स्याल, रिंकू, विनोद चेयरमैन (काज़ीपुर), बाल किशोर, ईश्वर सिंह, कालूराम, सतीश, गौरव भड़ाना, पवन, राजदीप, ज्ञानेंद्र, मनोज प्रधान, रेगसिंग, नीटू, कपिल भड़ाना, दिनेश शर्मा, विनोद यादव, मोहित यादव.


एडवोकेट आदेश प्रधान का बयान: “पुलिस कानून का मजाक उड़ा रही है. पहले विपुल चपराना को शांति भंग में चालान, फिर मुकदमा और बाद में धारा बढ़ाई गई-यह पूरी तरह गलत है. पुलिस को दबावमुक्त होकर निष्पक्ष काम करना चाहिए और अपनी छवि सुधारनी चाहिए.”
यह मामला क्षेत्र में तनाव बढ़ा रहा है, और रविवार की पंचायत पर सबकी नजरें टिकी हैं.
