By: The Trek News Desk
मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में दिए अपने एक कड़े भाषण में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन, भारत और NATO देशों पर रूस के यूक्रेन युद्ध को वित्तीय सहायता देने का आरोप लगाया. ट्रंप ने कहा कि इन देशों द्वारा रूस से तेल और ऊर्जा उत्पादों की खरीदारी युद्ध को और बढ़ावा दे रही है.
चीन और भारत पर युद्ध को फंड करने का आरोप
राष्ट्रपति ट्रंप ने सबसे पहले चीन और भारत पर सीधा निशाना साधा और कहा कि ये दोनों देश रूस के युद्ध को वित्तीय रूप से मदद कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि इन देशों के लिए रूस से तेल की खरीद युद्ध को लंबे समय तक जारी रखने में मददगार साबित हो रही है.
“चीन और भारत रूस से तेल खरीदकर इस युद्ध के मुख्य फंडर बन गए हैं,” ट्रंप ने कहा. “लेकिन और भी अविवेकपूर्ण बात यह है कि NATO के देशों ने भी रूस से ऊर्जा आयात को पर्याप्त रूप से बंद नहीं किया है. यह मुझे दो हफ्ते पहले पता चला, और मुझे यह जानकर नाखुशी हुई. वे खुद के खिलाफ युद्ध को फंड कर रहे हैं. ऐसा तो किसी ने सुना भी नहीं होगा.”

रूस पर ज़्यादा शुल्क लगाने की धमकी
ट्रंप ने रूस को सीधे चेतावनी दी कि अगर वह शांति समझौता करने के लिए तैयार नहीं होता है, तो अमेरिका पूरी तरह से रूस पर उच्च शुल्क (tariffs) लगाने के लिए तैयार है. ट्रंप का मानना है कि ये शुल्क युद्ध को जल्द खत्म कर सकते हैं.
“हम पूरी तरह से तैयार हैं कि हम रूस पर एक बहुत मजबूत और प्रभावी शुल्क लगाएंगे, जो मुझे विश्वास है, बहुत जल्दी इस रक्तपात को रोक देगा,” ट्रंप ने कहा. उन्होंने यूरोपीय देशों से भी इस कदम में अमेरिका का साथ देने की अपील की.
अर्थव्यवस्था और सीमा सुरक्षा पर जोर
अमेरिका की आंतरिक स्थिति पर चर्चा करते हुए ट्रंप ने अपनी सरकार की आर्थिक उपलब्धियों को रेखांकित किया. उन्होंने “अमेरिकी इतिहास में सबसे बड़े टैक्स कट्स” की घोषणा की, साथ ही स्टॉक मार्केट की मजबूती और बढ़ती मजदूरी पर भी गौर किया.
“एक साल पहले हमारा देश मुश्किलों में था, लेकिन आज हम सबसे गर्म और सफल देश बन चुके हैं,” ट्रंप ने कहा. “अमेरिका को सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था, सबसे मजबूत सीमा और सबसे बेहतर सेना का आशीर्वाद प्राप्त है.”
सीमा सुरक्षा पर उन्होंने दावा किया, “पिछले चार महीनों में हमारे देश में अवैध अप्रवासियों की संख्या शून्य हो गई है. हमारा संदेश बहुत स्पष्ट है: अगर आप अवैध रूप से अमेरिका आए, तो आपको जेल जाना पड़ेगा.”
सात युद्धों को समाप्त करने का दावा
ट्रंप ने वैश्विक संघर्षों की ओर भी इशारा किया और दावा किया कि उनकी सरकार ने सात युद्धों को समाप्त किया है. उन्होंने इज़राइल-ईरान, पाकिस्तान-भारत, और आर्मेनिया-आज़र्बैजान जैसे विवादों का उल्लेख किया.
“कोई और राष्ट्रपति ऐसा कुछ भी नहीं कर सका,” उन्होंने गर्व से कहा, हालांकि इस बयान पर आलोचना भी हो सकती है क्योंकि कुछ युद्ध अभी भी जारी हैं.
संयुक्त राष्ट्र पर आलोचना
ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र (UN) पर भी कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि यूएन अपनी पूरी क्षमता का उपयोग करने में नाकाम रहा है और संघर्षों को हल करने में केवल “खाली शब्दों” तक सीमित रह गया है.
“संयुक्त राष्ट्र अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पा रहा है. यह केवल युद्धों और संघर्षों पर खाली शब्दों से काम चला रहा है,” ट्रंप ने कहा. उन्होंने न्यूयॉर्क में यूएन मुख्यालय के पुनर्निर्माण की अपनी कोशिशों का भी हवाला दिया, जो पहले असफल रही थी.
UNGA में ट्रंप का भाषण कड़े बयानों और साहसी कदमों की योजना का मिश्रण था. रूस के खिलाफ उच्च शुल्क लगाने और चीन, भारत तथा NATO देशों को युद्ध को वित्तीय सहायता देने के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए, उन्होंने “अमेरिका फर्स्ट” के सिद्धांत पर जोर दिया. हालांकि, यह देखना बाकी है कि उनके ये प्रस्ताव वैश्विक मंच पर कितने प्रभावी साबित होंगे, लेकिन उनका भाषण निश्चित रूप से वैश्विक राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनेगा.
Source: News Agencies
