By: लव कुमार सिंह
हिंदी साहित्य में इन दिनों सनसनी मची हुई है. कारण ये है कि जिस हिंदी जगत में अपनी किताब छपवाने के लिए पैसे देने पड़ते हैं या किताब बिकती भी है तो प्रकाशक रॉयल्टी मार लेते हैं, वहां एक लेखक को छह महीने की रॉयल्टी 30 लाख रुपये मिली है.
30 लाख की रॉयल्टी वाले ये लेखक हैं श्री विनोद कुमार शुक्ल जी. और उन्हें ये रॉयल्टी देने वाले प्रकाशक हैं हिंदी युग्म. प्रकाशन ने बाकायदा आपने चौथे सालाना समारोह में 30 लाख का चेक लेखक को सौंपा.
बहुत से लोग इस जबरदस्त रॉयल्टी पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं तो बहुत सारे लोग इसकी स्वागत कर रहे हैं. ये वही विनोद कुमार शुक्ल हैं जिनका पहले एक प्रकाशक से रॉयल्टी यानी बिक्री में हिस्से को लेकर विवाद भी हो चुका है.
हिंदी युग्म ने विनोद जी की कई किताबें छापी हैं, जिनमें से एक किताब की बिक्री सबसे ज्यादा बताई जा रही है. यह किताब एक उपन्यास है, जिसका नाम है- दीवार में एक खिड़की रहती थी.

इस किताब की जितनी रॉयल्टी मिली है, उस हिसाब से यह रोजाना 500 की संख्या में बिकी है. चर्चा में आने के बाद यह और ज्यादा बिकेगी.
दीवार में एक खिड़की रहती थी को साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिल चुका है. उनके उपन्यास नौकर की कमीज पर फिल्म भी बन चुकी है. विनोद जी को 2024 का ज्ञानपीठ पुरस्कार भी मिला है.
