By: The Trek News Desk
गृहयुद्ध से जूझ रहे म्यांमार में सेना-शासित सरकार ने लगभग पाँच साल बाद आम चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, लेकिन इस चुनाव को देश-विदेश में व्यापक रूप से “दिखावा” करार दिया जा रहा है. प्रमुख विपक्षी दलों पर प्रतिबंध, नेताओं की गिरफ्तारी और देश के बड़े हिस्से में हिंसा के चलते आधे से अधिक आबादी के मतदान से दूर रहने की आशंका जताई जा रही है.
सैन्य तख्तापलट के बाद सत्ता में आई जुंटा सरकार तीन चरणों में चुनाव करा रही है. यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब देश में सेना और विद्रोही गुटों के बीच संघर्ष जारी है और कई इलाके अभी भी सरकार के नियंत्रण से बाहर हैं. विश्लेषकों का कहना है कि चीन के समर्थन से सेना इस चुनाव के ज़रिए अपनी सत्ता को वैध ठहराने और राजनीतिक गतिरोध से निकलने की कोशिश कर रही है.
चुनाव का विरोध करने वालों पर कड़ा शिकंजा कसा गया है. जुलाई में लागू किए गए एक नए कानून के तहत अब तक 200 से ज्यादा लोगों पर चुनाव में बाधा डालने या विरोध करने के आरोप लगे हैं. इस कानून में कठोर सज़ा, यहां तक कि मौत की सज़ा का भी प्रावधान है. मशहूर फिल्म निर्देशक, अभिनेता और एक हास्य कलाकार को चुनाव प्रचार से जुड़ी एक फिल्म की आलोचना करने पर सात साल की सजा सुनाई गई है.
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने कहा है कि म्यांमार में अभिव्यक्ति, संगठन और शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता के लिए कोई अनुकूल माहौल नहीं बचा है. उन्होंने यह भी कहा कि आम नागरिक एक तरफ सेना के दबाव में हैं, तो दूसरी तरफ सशस्त्र विद्रोही समूहों की ओर से चुनाव बहिष्कार की धमकियां मिल रही हैं.
देश में जारी संघर्ष ने हालात और गंभीर कर दिए हैं. हज़ारों लोगों की जान जा चुकी है, लाखों विस्थापित हुए हैं और अर्थव्यवस्था तबाह हो चुकी है. मार्च में आए विनाशकारी भूकंप और अंतरराष्ट्रीय सहायता में कटौती ने मानवीय संकट को और गहरा दिया है. इन परिस्थितियों में चुनाव कराना अपने आप में एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है.

चुनाव आयोग के अनुसार, 330 में से 274 टाउनशिप में ही मतदान कराया जाएगा, बाकी क्षेत्रों को अस्थिर बताकर बाहर रखा गया है. अनुमान है कि देश के लगभग आधे हिस्से में मतदान नहीं हो पाएगा. जिन इलाकों में वोटिंग होगी, वहां भी सभी निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव नहीं होंगे, जिससे मतदान प्रतिशत का अनुमान लगाना मुश्किल है. नतीजों की घोषणा जनवरी के अंत तक होने की संभावना है.
इस बार कुल छह दल राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव लड़ रहे हैं, जिनमें सेना समर्थित यूनियन सॉलिडेरिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी भी शामिल है. वहीं 40 से अधिक दलों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, जिनमें आंग सान सू की, की नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी भी शामिल है. सू की और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता जेल में हैं या देश छोड़ चुके हैं.
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जनता इस चुनाव में दिलचस्पी नहीं रखती. पश्चिमी चिन राज्य के एक बुजुर्ग नागरिक ने कहा कि सेना जनता के लिए नहीं, बल्कि अपने शीर्ष अधिकारियों के हित में काम करती है. उनके मुताबिक, पहले लोकतंत्र की थोड़ी झलक ज़रूर मिली थी, लेकिन अब हालात बद से बदतर हैं.
ब्रिटेन, यूरोपीय संसद समेत कई पश्चिमी देशों ने इस चुनाव को अविश्वसनीय बताया है, जबकि आसियान ने चुनाव से पहले राजनीतिक संवाद की मांग की है. हालांकि, म्यांमार की सैन्य सरकार इन आरोपों को खारिज करते हुए कह रही है कि चुनाव देश और जनता के हित में हैं, न कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को खुश करने के लिए.
सैन्य प्रमुख मिन आंग ह्लाइंग ने चेतावनी दी है कि जो लोग मतदान से दूर रहेंगे, वे लोकतंत्र की दिशा में प्रगति को ठुकरा रहे हैं.
Source: News Agencies

80jilinet is where I go to chill and play. The site’s cool, and I’ve been lucky a couple of times. Giving it a thumbs up! Go check: 80jilinet