तमिलनाडु: व्हाइट पेपर का बड़ा खुलासा, राज्य की टैक्स वसूली में आई भारी गिरावट

By: The Trek News Desk

तमिलनाडु सरकार द्वारा जारी व्हाइट पेपर में राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर कई चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में राज्य की अपनी कर संग्रह क्षमता (State Own Tax Revenue – SOTR) में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, जिसे दस्तावेज़ में “राज्य के कर प्रयासों का कमज़ोर पड़ना” बताया गया है.

राज्य के वित्त मंत्री एन. विलसन द्वारा विधानसभा में पेश किए गए इस दस्तावेज़ में तमिलनाडु की तुलना महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों से की गई है. रिपोर्ट का दावा है कि कर संग्रह के मामले में तमिलनाडु का प्रदर्शन इन राज्यों की तुलना में कमज़ोर रहा है.

व्हाइट पेपर के अनुसार, राज्य की अपनी कर आय का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के मुकाबले अनुपात वर्ष 2021-22 में 5.93 प्रतिशत था, जो 2025-26 में घटकर 5.45 प्रतिशत रह गया. यह आंकड़ा राज्य के इतिहास में सबसे निचले स्तरों में से एक माना जा रहा है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के बाद के वर्षों में जहां महाराष्ट्र ने अपने कर-से-जीडीपी अनुपात में सुधार किया, वहीं कर्नाटक और गुजरात ने भी अपनी स्थिति लगभग स्थिर बनाए रखी. इसके विपरीत तमिलनाडु अकेला ऐसा राज्य रहा जहां इस अनुपात में गिरावट दर्ज की गई.

राज्य की कर आय मुख्य रूप से जीएसटी, पेट्रोलियम उत्पादों पर वैट, शराब पर उत्पाद शुल्क और वैट, स्टांप एवं पंजीकरण शुल्क तथा मोटर वाहन कर से प्राप्त होती है.

व्हाइट पेपर में बताया गया है कि वाणिज्यिक करों का जीएसडीपी में योगदान वर्ष 2021-22 के लगभग 4.53 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में 3.89 प्रतिशत रह गया. यह गिरावट अन्य तुलनात्मक राज्यों में देखने को नहीं मिली.

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कर संग्रह में गिरावट केवल आर्थिक परिस्थितियों का परिणाम नहीं है. दस्तावेज़ के अनुसार, राजस्व जुटाने वाले विभागों में संभावित अनियमितताओं, कर रिसाव और प्रशासनिक कमियों ने भी इस स्थिति को गंभीर बनाया है.

राज्य की कर आय में कमी का एक बड़ा प्रभाव कर्ज भुगतान पर भी दिखाई दे रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2021-22 में राज्य की कर आय का 33.83 प्रतिशत हिस्सा ब्याज भुगतान में खर्च हो रहा था, जो 2025-26 में बढ़कर 34.83 प्रतिशत तक पहुंच गया.

व्हाइट पेपर में प्रस्तुत आंकड़ों ने राज्य की वित्तीय नीतियों और राजस्व प्रबंधन को लेकर नई बहस छेड़ दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कर संग्रह में सुधार नहीं हुआ तो भविष्य में राज्य की विकास योजनाओं और वित्तीय स्थिरता पर दबाव बढ़ सकता है.

Source: News Agencies

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