By: The Trek News Desk
केंद्र सरकार ने लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत की गई हिरासत को रद्द करने का फैसला किया है. यह कदम उनकी गिरफ्तारी के लगभग छह महीने बाद उठाया गया है, जब क्षेत्र में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया था.
यह फैसला उस समय आया है जब सुप्रीम कोर्ट में वांगचुक की पत्नी गीताांजलि जे. आंगमो द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई होनी है. इस याचिका में एनएसए के तहत वांगचुक की हिरासत को चुनौती दी गई थी. न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ इस मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च (मंगलवार) को करेगी. अदालत ने साफ किया है कि इस तारीख के बाद मामले में और दलीलें नहीं सुनी जाएंगी.
सोनम वांगचुक को पिछले साल 26 सितंबर को एनएसए के तहत हिरासत में लिया गया था. उन पर 24 सितंबर को लद्दाख में हुए हिंसक प्रदर्शनों को भड़काने में भूमिका निभाने का आरोप लगाया गया था. उस दिन पुलिस फायरिंग में चार लोगों की मौत हो गई थी.
गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि 24 सितंबर को लेह में कानून-व्यवस्था की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई थी. सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से लेह के जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर 26 सितंबर को वांगचुक को एनएसए के तहत हिरासत में लिया गया था. उन्होंने बताया कि वांगचुक अब तक एनएसए के तहत निर्धारित हिरासत अवधि का लगभग आधा समय बिता चुके हैं.
प्रवक्ता ने कहा कि सरकार लद्दाख के विभिन्न समुदायों और हितधारकों के साथ लगातार बातचीत कर रही है ताकि क्षेत्र के लोगों की चिंताओं और आकांक्षाओं का समाधान किया जा सके. हालांकि, लगातार बंद और विरोध प्रदर्शनों के कारण क्षेत्र की सामान्य स्थिति प्रभावित हुई है, जिससे छात्रों, नौकरी के उम्मीदवारों, व्यापारियों, पर्यटन से जुड़े लोगों और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ा है.

सरकार ने कहा कि लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का माहौल बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है, ताकि सभी पक्षों के साथ सार्थक बातचीत आगे बढ़ाई जा सके. इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए विचार-विमर्श के बाद वांगचुक की हिरासत को तत्काल प्रभाव से ख़त्म करने का निर्णय लिया गया है.
बयान में यह भी कहा गया कि सरकार लद्दाख के लिए आवश्यक सुरक्षा और संवैधानिक प्रावधानों को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराती है. सरकार को उम्मीद है कि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों का समाधान उच्चस्तरीय समिति और अन्य संवाद मंचों के माध्यम से रचनात्मक बातचीत से निकाला जा सकेगा.
Source: News Agencies
