आर.जी. कॉलेज में ई-कचरे के पुनर्चक्रण पर समझौता ज्ञापन का नवीनीकरण

By: प्रेरणा भारती

आर.जी.पी.जी. कॉलेज में वसुधा इको क्लब और जागरूक नागरिक संगठन (एनजीओ) के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) का नवीनीकरण किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज की प्राचार्या प्रो. निवेदिता कुमारी ने की. इस समझौते का मुख्य फोकस “रीसाइक्लिंग ऑफ इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट” (ई-कचरे का पुनर्चक्रण) पर है, जो वृत्ताकार अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा.

प्रो. निवेदिता कुमारी ने बताया कि ई-कचरे का पुनर्चक्रण संसाधनों के कुशल उपयोग को सुनिश्चित करता है. पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में सोना, चांदी, तांबा और प्लास्टिक जैसी मूल्यवान सामग्रियां होती हैं, जिन्हें रीसाइक्लिंग से पुनः प्राप्त किया जा सकता है. इससे नए खनन की जरूरत कम होती है और कचरा घटता है. समझौते के तहत कॉलेज की छात्राएं ई-कचरा रीसाइक्लिंग पर पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित करेंगी तथा रैली निकालकर समाज को जागरूक करेंगी.

कार्यक्रम की कन्वीनर और डीन ऑफ साइंस प्रो. कल्पना चौधरी ने कहा कि ई-कचरा रीसाइक्लिंग पर्यावरण को विषाक्त पदार्थों (सीसा, पारा, कैडमियम) से बचाता है, जो मिट्टी, पानी और हवा को प्रदूषित कर सकते हैं. यह मूल्यवान संसाधनों का संरक्षण करता है, लैंडफिल का दबाव कम करता है, ऊर्जा खपत घटाता है और कार्बन फुटप्रिंट को नियंत्रित करता है. साथ ही, डेटा सुरक्षा सुनिश्चित होती है. ई-कचरे से तांबा, एल्यूमीनियम, सोना और लिथियम जैसी धातुओं की रिकवरी से भारत की आयात निर्भरता कम हो सकती है.

जागरूक नागरिक संगठन के अध्यक्ष श्री गिरीश कुमार शुक्ला ने प्रक्रिया समझाते हुए कहा कि ई-कचरा उपभोक्ताओं, व्यवसायों या असंगठित क्षेत्र से एकत्र किया जाता है. उपयोगी धातुओं और गैर-धातुओं को अलग कर रासायनिक एवं भौतिक प्रक्रियाओं से कीमती धातुएं (सोना, चांदी, तांबा) और दुर्लभ तत्व (लिथियम, कोबाल्ट) निकाले जाते हैं, जिन्हें नए इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों में इस्तेमाल किया जाता है.

कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रो. रजनी श्रीवास्तव, कु. शैल वर्मा, डॉ. गीता सिंह, डॉ. मधु मलिक और डॉ. अनुपमा सिंह का विशेष योगदान रहा. यह पहल पृथ्वी और मानव स्वास्थ्य के लिए टिकाऊ भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

Source: News Agencies

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