मेरठ के नए मंडलायुक्त भानू चंद्र गोस्वामी: अनुभवी IAS अधिकारी से विकास की नई उम्मीदें

By: प्रेरणा भारती

उत्तर प्रदेश के मेरठ मंडल में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा बदलाव आया है. 2009 बैच के आईएएस अधिकारी भानू चंद्र गोस्वामी ने आज मेरठ के नए मंडलायुक्त के रूप में कार्यभार संभाल लिया. उनके आगमन से स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति मिलने और जनकल्याण योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन की अपेक्षा बढ़ गई है. गोस्वामी को पूर्व मंडलायुक्त ऋषिकेश भास्कर यशोध के स्थान पर नियुक्त किया गया है, जिनका 10 महीने के कार्यकाल के बाद तबादला हो गया.

कार्यभार ग्रहण करते ही गोस्वामी ने मीडिया से बातचीत में अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया. उन्होंने कहा, “मेरा मुख्य फोकस सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर के व्यक्ति तक पहुंचाना, शहर को स्वच्छ और हरित बनाना तथा विकास परियोजनाओं में तेज़ी लाना होगा.” गोस्वामी ने ज़ोर देकर कहा कि वे जनप्रतिनिधियों, आम नागरिकों और मीडिया के साथ पूर्ण समन्वय स्थापित कर जनता की शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करेंगे. मेरठ मंडल के छह जिलों, मेरठ, बागपत, बुलंदशहर, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर और हापुड़ में बुनियादी ढांचे के विकास और कानून-व्यवस्था को मज़बूत करने पर उनका विशेष ध्यान रहेगा.

भानू चंद्र गोस्वामी: एक नज़र में प्रोफाइल

भानू चंद्र गोस्वामी झारखंड के रांची के मूल निवासी हैं. उनका जन्म 20 अगस्त 1984 को हुआ था. उनके पिता हरिश्चंद्र गोस्वामी बिहार-झारखंड सरकार में श्रम अधीक्षक के पद पर कार्यरत रहे, जबकि दादा राम नवल गोस्वामी हेवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन (HEC) रांची में तैनात थे. परिवार में प्रशासनिक परंपरा का बोलबाला है. उनके चाचा केशव चंद्र गोस्वामी उत्तर प्रदेश पुलिस में आईपीएस अधिकारी हैं और वर्तमान में लखनऊ में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के रूप में सेवा दे रहे हैं. गोस्वामी की पत्नी मेघा गोस्वामी हैं.

शिक्षा के क्षेत्र में गोस्वामी ने संस्कृत ऑनर्स में स्नातक की उपाधि प्राप्त की. सिविल सेवा की तैयारी के दौरान उन्होंने प्रीलिम्स में साइकोलॉजी को वैकल्पिक विषय चुना, जबकि मेन्स में साइकोलॉजी और संस्कृत पर फोकस किया. 2009 में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में उन्होंने 33वीं अखिल भारतीय रैंक हासिल की, जो उनके दृढ़ संकल्प का प्रमाण है.

प्रशासनिक सफर: ज़मीनी स्तर से शीर्ष तक

आईएएस प्रशिक्षण पूरा करने के बाद गोस्वामी की पहली तैनाती 2011-12 में आगरा में जॉइंट मजिस्ट्रेट के रूप में हुई. इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं:

– वाराणसी: जिलाधिकारी के रूप में सांस्कृतिक और पर्यटन विकास पर जोर.

– श्रावस्ती: ग्रामीण विकास और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार.

– लखनऊ: शहरी प्रशासन और नीति निर्माण में योगदान.

– जौनपुर: शिक्षा और स्वास्थ्य योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन.

– प्रयागराज: 2019 के अर्धकुंभ में जिलाधिकारी और प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) के उपाध्यक्ष के रूप में ऐतिहासिक आयोजन की सफलता सुनिश्चित की. यहां उनकी भूमिका लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा में अहम रही.

हाल ही में 2024 में आगरा मंडलायुक्त के पद पर रहते हुए बाढ़ और अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्रों में राहत आयुक्त के रूप में उत्कृष्ट कार्य किया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा उन्हें भरोसेमंद अधिकारी माना जाता है. जनवरी 2025 में महाकुंभ के दौरान प्रयागराज में भगदड़ की घटना के बाद उन्हें पुनः महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई, जहां उनकी निर्णय क्षमता और जमीनी स्तर पर सक्रियता की सराहना हुई.

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