सूडान के दारफुर में भुखमरी का संकट गहराया, कई और कस्बों में हालात भयावह

By: The Trek News Desk

सूडान के पश्चिमी दारफुर क्षेत्र में भुखमरी की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है. संयुक्त राष्ट्र समर्थित खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि उत्तर दारफुर के उम बारू और केर्नोई इलाकों में कुपोषण भुखमरी के स्तर को पार कर चुका है. देश में जारी गृहयुद्ध के चलते लाखों लोग गंभीर खाद्य संकट का सामना कर रहे हैं.

इंटीग्रेटेड फूड सिक्योरिटी फेज क्लासिफिकेशन (IPC) द्वारा गुरुवार को जारी अलर्ट में बताया गया कि इन दोनों क्षेत्रों में बच्चों में तीव्र कुपोषण की दर तय भुखमरी सीमा से ऊपर पहुंच गई है. हालांकि यह अलर्ट औपचारिक रूप से भुखमरी की घोषणा नहीं है, लेकिन हालिया आंकड़ों के आधार पर हालात को बेहद चिंताजनक बताया गया है.

रिपोर्ट के अनुसार, उम बारू में पांच वर्ष से कम उम्र के 53 प्रतिशत बच्चे गंभीर कुपोषण का शिकार हैं, जो भुखमरी की सीमा से लगभग दोगुना है. वहीं, केर्नोई में करीब एक-तिहाई बच्चे तीव्र कुपोषण से जूझ रहे हैं.

आईपीसी ने चेतावनी दी कि ये आंकड़े अत्यधिक मृत्यु दर के खतरे की ओर इशारा करते हैं और आशंका है कि आसपास के इलाकों में भी हालात उतने ही विनाशकारी हो सकते हैं.

यह अलर्ट फरवरी तक उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित है और ऐसे समय आया है जब करीब तीन महीने पहले ही आईपीसी ने उत्तर दारफुर की राजधानी एल-फशेर और दक्षिण कोर्दोफान की राजधानी काडुगली में भुखमरी की पुष्टि की थी. एल-फशेर, जो लंबे समय तक सूडानी सेना का आखिरी मजबूत गढ़ माना जाता था, 18 महीनों की घेराबंदी और भुखमरी के बाद अक्टूबर में रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) के नियंत्रण में चला गया था.

उम बारू और केर्नोई, दोनों चाड सीमा के पास स्थित हैं और एल-फशेर के पतन के बाद यहां बड़ी संख्या में विस्थापित लोग पहुंचे थे. इन इलाकों में भी हाल के दिनों में संघर्ष की ख़बरें सामने आई हैं.

गौरतलब है कि अप्रैल 2023 से सूडान सेना और अर्धसैनिक आरएसएफ के बीच जारी जंग ने देश को मानवीय तबाही की ओर धकेल दिया है. इस संघर्ष में अब तक दसियों हजार लोगों की मौत, करीब 1.1 करोड़ लोग विस्थापित, और कई क्षेत्र भुखमरी की चपेट में आ चुके हैं.

आईपीसी ने यह भी चेताया है कि दारफुर और पड़ोसी कोर्दोफान क्षेत्र के कम से कम 20 अन्य इलाके भी भुखमरी के गंभीर खतरे में हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तत्काल मानवीय सहायता और संघर्ष विराम की कोशिशों को तेज़ नहीं किए गया तो सूडान में हालात और अधिक भयावह हो सकते हैं.

Source: News Agencies

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