By: The Trek News Desk
पोप लियो XIV ने मंगलवार को 2020 के बेरुत पोर्ट विस्फोट स्थल पर प्रार्थना कर अपनी तीन दिवसीय लेबनान यात्रा का समापन किया. यह जगह उसी हादसे की याद दिलाती है जिसमें 220 से अधिक लोग मारे गए और 6,500 से ज्यादा घायल हुए थे.
मौन प्रार्थना, दीप प्रज्वलन और पीड़ित परिवारों से मुलाकात
अमेरिका में जन्मे इस पोप ने स्मारक स्थल पर मौन रखा, एक दीपक जलाया और फिर विस्फोट से बचे लोगों व पीड़ितों के परिजनों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की.
मलबे के ढेर और ध्वस्त बंदरगाह की पृष्ठभूमि में उन्होंने हर परिवार से हाथ मिलाया और आशीर्वाद दिया.
एक व्यक्ति, जिनके भाई विस्फोट में मारे गए थे, ने कहा, “हम पोप के इस कदम के लिए बेहद आभारी हैं. हमें पता है कि वे न्याय के लिए आवाज़ उठाते हैं, और हमें न्याय ही चाहिए.”
नेताओं को संदेश, ‘सत्य का रास्ता अपनाएँ’
लेबनान पहुँचते ही पोप ने देश के नेताओं से आग्रह किया था कि वे राजनीतिक टालमटोल छोड़कर सच की खोज को शांति और मेल-मिलाप का आधार बनाएं.

“जातीय और राजनीतिक दीवारें हटाएँ” – पोप
बेरुत वॉटरफ्रंट पर आयोजित खुले मैदान के मास में करीब 1,50,000 लोग मौजूद रहे.
पोप लियो ने कहा, “हमें एक होकर इस धरती की गरिमा वापस लानी होगी. अपने जातीय और राजनीतिक कवच उतार दीजिए.”
उन्होंने एक ऐसे लेबनान की कल्पना की जहाँ शांति और न्याय स्थायी हों और लोग एक-दूसरे को भाई-बहन की तरह स्वीकार करें.
2012 में पोप बेनेडिक्ट XVI के दौरे में लगभग 3 लाख लोग जुटे थे, आज की भीड़ उससे लगभग आधी रही. इसका कारण हाल के वर्षों में लेबनान से हुए बड़े पैमाने पर पलायन को माना जा रहा है, खासकर आर्थिक गिरावट, भ्रष्टाचार और सांप्रदायिक तनावों के बीच.
मध्य पूर्व शांति पर वैश्विक अपील
लेबनान यात्रा, तुर्किये से शुरू हुई पोप की विदेश यात्रा का दूसरा चरण थी. दोनों देशों में उन्होंने मध्य पूर्व में हिंसा के अंत और वैश्विक संघर्षों पर गंभीर चेतावनी दी.
उन्होंने कहा, मानवता का भविष्य खूनखराबे की इस राह में खो सकता है, इसलिए शांति ही वास्तविक रास्ता है.
Source: News Agencies
