नोबेल शांति पुरस्कार विजेता की घोषणा के बाद वेनेज़ुएला ने नॉर्वे में अपना दूतावास बंद करने का फैसला लिया

By: The Trek News Desk

वेनेज़ुएला की सरकार ने नॉर्वे में स्थित अपना दूतावास बंद करने का निर्णय लिया है, यह फैसला उस वक्त आया है जब देश की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो को 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किए जाने की घोषणा की गई है. मचाडो को यह पुरस्कार “लैटिन अमेरिका में हाल के समय में नागरिक साहस के असाधारण उदाहरण” पेश करने के लिए दिया गया है.

नॉर्वे के विदेश मंत्रालय ने इस खबर की पुष्टि करते हुए कहा कि वेनेज़ुएला की ओर से दूतावास बंद करने का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है. एक प्रवक्ता ने कहा,

“यह दुर्भाग्यपूर्ण है. हालांकि हमारे बीच कई मुद्दों पर मतभेद हैं, फिर भी नॉर्वे वेनेज़ुएला के साथ संवाद बनाए रखने का इच्छुक है और हम इस दिशा में कार्य करते रहेंगे.”

नॉर्वे सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि नोबेल पुरस्कारों की चयन समिति पूरी तरह से स्वतंत्र संस्था है और उसका देश की आधिकारिक नीतियों से कोई लेना-देना नहीं होता.

मचाडो की नोबेल जीत और राजनीतिक भूचाल

मारिया कोरीना मचाडो, जो 2024 से छिपकर रह रही थीं, उन्हें पिछले वर्ष वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति चुनाव में भाग लेने से रोक दिया गया था. उस चुनाव में मौजूदा राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने विवादास्पद ढंग से जीत हासिल की थी, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी आलोचना मिली थी.

मचाडो ने अपनी नोबेल जीत को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और “वेनेज़ुएला की पीड़ित जनता” को समर्पित किया. उनकी इस टिप्पणी ने वेनेज़ुएला सरकार की नाराज़गी को और भड़का दिया.

ऑस्ट्रेलिया में भी दूतावास बंद, अफ्रीका में नए सहयोगी

नॉर्वे के साथ-साथ वेनेज़ुएला ने ऑस्ट्रेलिया में भी अपना दूतावास बंद करने का निर्णय लिया है. इसके बदले, वे देश दो नए दूतावास बुर्किना फासो और जिम्बाब्वे में खोलने जा रहा है, जिन्हें सरकार ने “औपनिवेशिक विरोध और वर्चस्ववादी ताकतों के खिलाफ संघर्ष में रणनीतिक साझेदार” बताया है.

उल्लेखनीय है कि न तो नॉर्वे और न ही ऑस्ट्रेलिया के पास वेनेज़ुएला में अपना दूतावास है, इन दोनों देशों की वाणिज्यिक सेवाएं कोलंबिया स्थित दूतावासों से संचालित होती हैं.

अमेरिका से तनाव और बढ़ता दबाव

वेनेज़ुएला और अमेरिका के बीच वर्षों से रिश्ते तनावपूर्ण बने हुए हैं. हाल ही में, अमेरिका ने लैटिन अमेरिका की कुख्यात ड्रग कार्टेल्स, जिनमें वेनेज़ुएला का ट्रेन दे अरागुआ” भी शामिल है, जिसके खिलाफ आधिकारिक अभियान शुरू किया है.

सितंबर 2025 से अब तक, अमेरिकी सेना ने कैरेबियन सागर में कम से कम चार बार उन नौकाओं पर हमले किए हैं जो कथित तौर पर ड्रग तस्करी में शामिल थीं. ये हमले व्हाइट हाउस के निर्देश पर किए गए.

राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने इन कार्रवाइयों को “सरकार बदलने की साजिश” बताते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अमेरिका के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.

Source: News Agencies

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