By: The Trek News Desk
उन्नाव दुष्कर्म मामले में एक अहम घटनाक्रम के तहत सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें निष्कासित भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सज़ा को निलंबित किया गया था. शीर्ष अदालत ने इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की याचिका पर सुनवाई करते हुए सेंगर को नोटिस भी जारी किया है.
दरअसल, 23 दिसंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने यह कहते हुए सेंगर की सज़ा निलंबित कर दी थी कि वह इस मामले में सात साल से अधिक समय जेल में बिता चुका है. हाईकोर्ट ने यह राहत उसकी अपील लंबित रहने तक दी थी, जिसमें उसने वर्ष 2019 के ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है.
हालांकि, हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद सेंगर को जेल से रिहा नहीं किया गया था, क्योंकि वह पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में 10 साल की सज़ा भी काट रहा है और उस केस में उसे ज़मानत नहीं मिली है.
दिल्ली हाईकोर्ट ने सज़ा निलंबन के साथ कई सख्त शर्तें भी लगाई थीं. इनमें 15 लाख रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के तीन ज़मानतदार देना, पीड़िता के दिल्ली स्थित आवास से पांच किलोमीटर की दूरी बनाए रखना और पीड़िता या उसकी मां को किसी भी तरह से धमकी न देना शामिल था. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि शर्तों के उल्लंघन की स्थिति में ज़मानत स्वतः रद्द कर दी जाएगी.

सोमवार को इस पूरे मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर तत्काल रोक लगा दी. इसके साथ ही अदालत ने CBI की अपील पर सेंगर से जवाब मांगा है. शीर्ष अदालत अब इस मामले में आगे की सुनवाई के दौरान यह तय करेगी कि हाईकोर्ट द्वारा दी गई राहत कानूनी रूप से उचित थी या नहीं.
यह मामला वर्ष 2017 का है और देशभर में इसे लेकर व्यापक जनआक्रोश देखने को मिला था. सुप्रीम कोर्ट के ताज़ा आदेश को पीड़िता के लिए न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
Source: News Agencies

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