अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को बड़ी राहत, CBI केस में सभी आरोपों से बरी

By: The Trek News Desk

आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दिल्ली आबकारी नीति मामले में बड़ी राहत मिली है. शुक्रवार को दिल्ली की एक ट्रायल कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज किए गए मामले में केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत 21 अन्य आरोपियों को डिस्चार्ज कर दिया. अदालत के इस फैसले से आम आदमी पार्टी को महत्वपूर्ण कानूनी राहत मिली है.

यह मामला जुलाई 2022 में दिल्ली के तत्कालीन मुख्य सचिव नरेश कुमार द्वारा उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को सौंपी गई एक रिपोर्ट के आधार पर शुरू हुआ था. रिपोर्ट में दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 के निर्माण और क्रियान्वयन में कथित प्रक्रियागत खामियों की ओर इशारा किया गया था.

रिपोर्ट के अनुसार, उस समय आबकारी मंत्री रहे मनीष सिसोदिया द्वारा लिए गए कुछ फैसलों को “मनमाना और एकतरफा” बताया गया था, जिनसे सरकारी खज़ाने को 580 करोड़ रुपये से अधिक का कथित नुकसान होने का अनुमान जताया गया. इसमें यह भी आरोप लगाया गया था कि शराब कारोबारियों को लाइसेंस फीस में छूट, जुर्माने में राहत और कोविड-19 के दौरान दी गई रियायतों के बदले कथित तौर पर कमीशन लिया गया, जिसका इस्तेमाल पंजाब और गोवा में 2022 के विधानसभा चुनावों को प्रभावित करने के लिए किया गया.

दिल्ली की नई आबकारी नीति नवंबर 2021 में लागू हुई थी, लेकिन विवाद बढ़ने के बाद इसे जुलाई 2022 में वापस ले लिया गया. इस पूरे प्रकरण में दो अलग-अलग जांच एजेंसियों ने केस दर्ज किए थे. एक मामला CBI ने दर्ज किया, जबकि कथित मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुरू की.

इस केस के चलते राजधानी में आम आदमी पार्टी के कई शीर्ष नेता जेल भी गए थे. इनमें अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह का नाम प्रमुख रूप से शामिल है. हालांकि अब CBI से जुड़े मामले में अदालत ने सभी को आरोपों से मुक्त कर दिया है, लेकिन ED द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग का मामला अभी भी विचाराधीन है.

अदालत के इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज़ हो गई है. आम आदमी पार्टी ने इसे “सच्चाई की जीत” बताया है, जबकि विपक्षी दलों की ओर से इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. फिलहाल, ED मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सबकी नज़र बनी हुई है.

Source: News Agencies

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *