वैश्विक प्रेस स्वतंत्रता में गिरावट, बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच पत्रकारिता पर संकट गहराया

By: The Trek News Desk

दुनिया भर में प्रेस स्वतंत्रता की स्थिति लगातार कमज़ोर होती जा रही है. रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) द्वारा जारी 2026 वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में यह सामने आया है कि लगभग तीन-चौथाई देशों में मीडिया की स्थिति “समस्याग्रस्त” या उससे भी ख़राब श्रेणी में पहुंच चुकी है.

RSF के अनुसार, केवल कुछ दर्जन देशों में ही पत्रकारों के लिए परिस्थितियाँ “संतोषजनक” मानी गई हैं. संगठन का कहना है कि पत्रकारों की स्वतंत्रता और सुरक्षा दोनों पर वैश्विक स्तर पर गंभीर ख़तरा बढ़ रहा है.

RSF प्रेस स्वतंत्रता को इस रूप में परिभाषित करता है कि पत्रकार बिना किसी राजनीतिक, आर्थिक, कानूनी या सामाजिक दबाव के और शारीरिक व मानसिक ख़तरे के बिना सार्वजनिक हित में समाचार का चयन, निर्माण और प्रसारण कर सकें.

रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया के 180 देशों में से लगभग 75% में मीडिया की स्थिति “समस्याग्रस्त” या उससे भी नीचे दर्ज की गई है. वहीं आधे से अधिक देशों में हालात “कठिन” से “बहुत गंभीर” तक पहुंच चुके हैं. 2013 में यह स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर थी, जब ऐसे देशों की संख्या एक-तिहाई से भी कम थी.

क्षेत्रीय स्तर पर भी बड़ा अंतर देखने को मिलता है. यूरोप को आम तौर पर प्रेस स्वतंत्रता के मामले में सबसे आगे माना गया है, जहां नॉर्वे, एस्टोनिया, नीदरलैंड्स और डेनमार्क शीर्ष स्थानों पर हैं. इसके विपरीत अफ्रीका और एशिया के कई हिस्सों में पत्रकारों को बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है.

वहीं भारत 2026 में 151वें स्थान से गिरकर 158वें स्थान पर पहुँच गया है.

यूरोप के भीतर भी विभाजन साफ है, जहां उत्तरी और पश्चिमी देश अपेक्षाकृत स्वतंत्र मीडिया वातावरण प्रदान करते हैं, वहीं दक्षिणी और पूर्वी यूरोप में चुनौतियाँ अधिक हैं. इसी तरह अफ्रीका में उत्तरी क्षेत्र के पत्रकार, दक्षिणी हिस्सों की तुलना में अधिक प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं.

कुल मिलाकर रिपोर्ट यह संकेत देती है कि दुनिया भर में लोकतांत्रिक मूल्यों के कमज़ोर होने के साथ-साथ प्रेस स्वतंत्रता पर दबाव लगातार बढ़ रहा है.

Source: News Agencies

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