By: The Trek News Desk
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका-इसराइल तथा ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में हलचल तेज़ हो गई है. इसी बीच G7 देशों ने कहा है कि दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए वे “ज़रूरी कदम उठाने के लिए तैयार” हैं.
हालांकि International Energy Agency (IEA) और G7 देशों के वित्त मंत्रियों की एक वर्चुअल बैठक के बाद भी आपातकालीन तेल भंडार को जारी करने पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया. बैठक में यह विकल्प चर्चा के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहा.
वैश्विक बाज़ार में कच्चे तेल की कीमत सोमवार को लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी. निवेशकों को आशंका थी कि यदि आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रही तो कीमतें और बढ़ सकती हैं. हालांकि बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस संकेत के बाद कि युद्ध जल्द ख़त्म हो सकता है, कीमतों में गिरावट देखी गई.
IEA के प्रमुख फातिह बिरोल ने बैठक में कहा कि पिछले कुछ दिनों में वैश्विक तेल बाज़ार की स्थिति बिगड़ी है. उनके मुताबिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से गुज़रने वाले मार्ग में चुनौतियां बढ़ गई हैं और कई क्षेत्रों में तेल उत्पादन भी कम हो गया है, जिससे बाज़ार में जोखिम बढ़ रहा है.
बिरोल के अनुसार IEA सदस्य देशों के पास इस समय लगभग 1.2 अरब बैरल का सार्वजनिक आपातकालीन तेल भंडार मौजूद है, जबकि उद्योग के पास सरकारों के निर्देश के तहत लगभग 60 करोड़ बैरल का अतिरिक्त भंडार रखा गया है.
बैठक के बाद फ्रांस के वित्त मंत्री रोलैंड लेस्क्योर ने कहा कि अभी आपातकालीन तेल भंडार जारी करने की स्थिति नहीं आई है, लेकिन हालात पर लगातार नज़र रखी जा रही है. अगर ऐसा कदम उठाया जाता है तो यह 2022 के बाद पहली बार होगा, जब रूस के यूक्रेन पर हमला करने के बाद रणनीतिक भंडार जारी किया गया था.
बैठक के बाद जारी बयान में G7 देशों ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने के लिए ज़रूरी कदम उठाने सहित तेल भंडार जारी करने जैसे विकल्प भी तैयार रखे गए हैं.
इस बीच ब्रिटेन की चांसलर राचेल रीव्स ने कहा कि बैठक में यूके ने मध्य पूर्व में तत्काल तनाव कम करने और क्षेत्र में जहाज़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई. उन्होंने यह भी कहा कि ज़रूरत पड़ने पर IEA के सामूहिक तेल भंडार को जारी करने के लिए वह समर्थन देने को तैयार हैं.
दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल की आपूर्ति आमतौर पर होर्मुज़ से होकर गुज़रती है, लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद से इस संकरे समुद्री मार्ग से जहाज़ों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है.
पिछले हफ्ते अमेरिका और इसराइल ने ईरान के कई ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिनमें तेल भंडारण भी शामिल था. वहीं ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के कुछ पड़ोसी देशों के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया. सऊदी अरब ने दावा किया कि उसने एक बड़े तेल क्षेत्र की ओर बढ़ रहे ड्रोन हमलों को रोक दिया.
इन घटनाओं के बाद वैश्विक बाज़ारों में घबराहट बढ़ गई. एशियाई बाज़ारों में सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 119.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, हालांकि बाद में यह 90 डॉलर से नीचे आ गई.
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर संघर्ष लंबा चलता है तो तेल की कीमतें 120 से 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं, जिससे उपभोक्ताओं और उद्योगों पर बड़ा आर्थिक दबाव पड़ सकता है.
Source: News Agencies
