By: The Trek News Desk
ईरान में पिछले महीने हुई हिंसक कार्रवाई के बाद पहली बार बड़े पैमाने पर छात्रों ने सरकार विरोधी प्रदर्शन किए हैं. राजधानी तेहरान समेत कई विश्वविद्यालयों में छात्रों ने रैलियां, मार्च और धरने आयोजित कर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की.
शरीफ युनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में शनिवार को नए सत्र की शुरुआत के मौके पर सैकड़ों छात्र परिसर में एकत्र हुए और शांतिपूर्ण मार्च निकाला. प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय झंडे थाम रखे थे और “तानाशाह मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाए, जो देश के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के खिलाफ थे. इसी दौरान पास में सरकार समर्थक समूह भी जुटा हुआ था, जिसके साथ झड़प की घटनाएं सामने आईं.
राजधानी की ही शहीद बेहिश्ती यूनिवर्सिटी में छात्रों ने शांतिपूर्ण धरना दिया. वहीं अमीर कबीर यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी से भी सरकार विरोधी नारेबाज़ी के वीडियो सामने आए हैं. उत्तर-पूर्वी शहर मशहद में छात्रों ने “आज़ादी” और “अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाओ” जैसे नारे लगाए.
इन प्रदर्शनों में छात्र जनवरी में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के दौरान मारे गए हज़ारों लोगों को श्रद्धांजलि दे रहे थे. मानवाधिकार समूह ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक उस दौर में कम से कम 6,159 लोगों की मौत की पुष्टि की गई, जिनमें बड़ी संख्या प्रदर्शनकारियों की थी. संगठन ने हज़ारों अन्य मौतों की जांच जारी होने की भी बात कही है.
हालांकि ईरानी अधिकारियों का दावा है कि लगभग 3,100 लोगों की मौत हुई, जिनमें अधिकतर सुरक्षाकर्मी या आम नागरिक थे.
छात्रों का यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है. अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों को संदेह है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जबकि तेहरान इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है.

हाल ही में दोनों देशों के अधिकारियों की स्विट्जरलैंड में मुलाकात हुई, जिसमें परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाने को लेकर कुछ प्रगति की बात कही गई. इसके बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि यदि समझौता नहीं हुआ तो सीमित सैन्य कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है. अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी भी बढ़ा दी है.
विदेश में रह रहे कुछ ईरानी विपक्षी नेता अमेरिकी हस्तक्षेप का समर्थन कर रहे हैं और मौजूदा सरकार के पतन की उम्मीद जता रहे हैं. वहीं, कई अन्य विपक्षी गुट बाहरी दखल के खिलाफ हैं. दोनों पक्ष सोशल मीडिया पर अपनी-अपनी दलीलों को आगे बढ़ाने में जुटे हैं.
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि शनिवार के प्रदर्शनों के बाद कितने छात्रों को हिरासत में लिया गया है. लेकिन ताज़ा घटनाक्रम ने संकेत दिया है कि देश में असंतोष की लहर थमी नहीं है और हालात आने वाले दिनों में और संवेदनशील हो सकते हैं.
Source: News Agencies
