एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर की गिरफ्तारी के बाद छापेमारी जारी, रॉयल लॉज की तलाशी में जुटी पुलिस

By: The Trek News Desk

ब्रिटेन के शाही परिवार से जुड़े एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर की गिरफ्तारी के एक दिन बाद भी पुलिस की जांच जारी है. गुरुवार को करीब 11 घंटे की पूछताछ के बाद रिहा किए गए माउंटबेटन-विंडसर पर सार्वजनिक पद के दुरुपयोग का संदेह जताया गया है. यह मामला उनके दिवंगत अमेरिकी वित्त कारोबारी जेफरी एपस्टीन से कथित संबंधों से जुड़ा है.

पुलिस ने उनके नए निवास सैंड्रिंघम एस्टेट स्थित आवास की तलाशी पूरी कर ली है, लेकिन अब भी रायल लॉज की जांच जारी है. यह 30 कमरों वाला उनका पूर्व आधिकारिक आवास है, जो विंडसर परिसर में स्थित है.

66वें जन्मदिन की सुबह पुलिस ने उनके आवास पर पहुंचकर उन्हें हिरासत में लिया और पूछताछ के लिए स्थानीय थाने ले गई. मामले की जांच थेम्स वैली पुलिस कर रही है. फिलहाल उन्हें न तो आरोपित किया गया है और न ही पूरी तरह से निर्दोष घोषित किया गया है.

मामले की जड़ में वे ईमेल बताए जा रहे हैं, जिन्हें पिछले महीने अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी किया गया था. इन ईमेल में कथित तौर पर माउंटबेटन-विंडसर द्वारा हांगकांग, वियतनाम और सिंगापुर की आधिकारिक यात्राओं से जुड़ी गोपनीय जानकारियां साझा करने का संकेत मिला है. एक ईमेल नवंबर 2010 का बताया गया है, जिसे प्राप्त होने के पांच मिनट के भीतर आगे भेजा गया था. वहीं एक अन्य संदेश में अफगानिस्तान के हेलमंद प्रांत के पुनर्निर्माण से जुड़े निवेश अवसरों की जानकारी साझा किए जाने का दावा है.

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक पद के दुरुपयोग को साबित करना आसान नहीं होता. वकीलों के अनुसार, सबसे पहले यह तय करना होगा कि संबंधित व्यक्ति उस समय सार्वजनिक अधिकारी की परिभाषा में आते थे या नहीं. अंतिम निर्णय क्राउन प्रासिक्यूशन सर्विस द्वारा लिया जाएगा, जो साक्ष्यों के आधार पर आरोप तय करने या न करने का फैसला करेगी.

अभियोजन पक्ष तथाकथित “कोड फॉर क्राउन प्रॉसिक्यूटर्स” के दो-स्तरीय परीक्षण को लागू करेगा, जिसके तहत पहले यह देखा जाएगा कि दोषसिद्धि की वास्तविक संभावना है या नहीं, और फिर यह कि मामला सार्वजनिक हित में है या नहीं.

माउंटबेटन-विंडसर को पिछले साल उनके भाई और ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स III द्वारा शाही उपाधियों और सम्मान से वंचित कर दिया गया था. उनकी गिरफ्तारी को आधुनिक ब्रिटिश इतिहास की सबसे गंभीर घटनाओं में से एक माना जा रहा है. बताया जा रहा है कि लगभग चार सदियों बाद किसी शाही सदस्य को इस तरह गिरफ्तार किया गया है.

स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान जांच उन आरोपों से अलग है, जो पहले वर्जीनिया जिउफ्रे द्वारा लगाए गए थे. उन्होंने दावा किया था कि वर्ष 2001 में उन्हें नाबालिग अवस्था में राजकुमार के साथ संबंध बनाने के लिए मज़बूर किया गया था. जिउफ्रे का पिछले वर्ष निधन हो गया था.

उनकी रिश्तेदार अमांडा रॉबर्ट्स ने गिरफ्तारी की खबर पर मिश्रित भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि यह क्षण उनके लिए भावनात्मक रूप से कठिन है, क्योंकि वह इस खबर को जिउफ्रे के साथ साझा नहीं कर सकतीं.

राजा चार्ल्स तृतीय ने एक संक्षिप्त बयान में कहा कि “कानून को अपना काम करने दिया जाना चाहिए” और चल रही जांच पर आगे टिप्पणी करना उचित नहीं होगा.

फिलहाल, जांच एजेंसियां साक्ष्यों की समीक्षा में जुटी हैं. माना जा रहा है कि कानूनी प्रक्रिया लंबी चल सकती है और आने वाले समय में इस मामले से जुड़े और खुलासे सामने आ सकते हैं.

Source: News Agencies

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