By: The Trek News Desk
ब्रिटेन की हाईकोर्ट ने सरकार द्वारा प्रो-फिलिस्तीनी अभियान समूह Palestine Action को “आतंकी संगठन” घोषित कर प्रतिबंधित करने के फैसले को गैरकानूनी करार दिया है. अदालत के इस फैसले को समूह ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए बड़ी जीत बताया है.
समूह की सह-संस्थापक हूदा अम्मोरी, जिन्होंने सरकार के फैसले को अदालत में चुनौती दी थी, ने कहा कि यह निर्णय ब्रिटेन में मौलिक स्वतंत्रताओं और फिलिस्तीनी अधिकारों के समर्थन की लड़ाई में “ऐतिहासिक जीत” है. उनके मुताबिक, सरकार का कदम हाल के ब्रिटिश इतिहास में अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सबसे कठोर प्रहारों में से एक था.
हालांकि, ब्रिटिश सरकार ने अदालत के फैसले पर असहमति जताते हुए इसे ऊपरी अदालत में चुनौती देने का ऐलान किया है. गृह मंत्री शबाना महमूद ने कहा कि वह अदालत के निर्णय से निराश हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार इस फैसले के खिलाफ कोर्ट ऑफ अपील में जाएगी.
ब्रिटेन सरकार ने जून 2025 में आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत Palestine Action पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी. इस कदम के बाद संगठन को al-Qaeda और ISIL जैसे प्रतिबंधित संगठनों की श्रेणी में रखा गया था. इससे संगठन से जुड़ना या समर्थन करना आपराधिक अपराध बन गया था.
प्रतिबंध के बाद पूरे ब्रिटेन में विरोध प्रदर्शन हुए और मानवाधिकार संगठनों ने सरकार के फैसले की आलोचना की. अभियान समूह Defend Our Juries के अनुसार, “मैं नरसंहार का विरोध करता/करती हूं, मैं Palestine Action का समर्थन करता/करती हूं” जैसे संदेश वाले पोस्टर लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने पर करीब 2,787 लोगों को आतंकवाद से जुड़े आरोपों में गिरफ्तार किया गया था.
अब अदालत के फैसले के बाद इन गिरफ्तारियों को अवैध माना जा सकता है.
फैसले के बाद लंदन स्थित अदालत परिसर के बाहर समर्थकों में उत्साह देखा गया. कई लोग फिलिस्तीन के समर्थन में नारे लगाते नज़र आए.
कलाकार निकोला मोक्सहम, जिन्हें संगठन के समर्थन में गिरफ्तार किया गया था, ने फैसले को “इंसाफ की जीत” बताया. उनका कहना था कि यह निर्णय शांतिपूर्ण प्रतिरोध और फिलिस्तीन के समर्थन में आवाज उठाने वालों के लिए बड़ी राहत है.
यह मामला ब्रिटेन में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, विरोध के अधिकार और आतंकवाद-रोधी कानूनों के इस्तेमाल पर व्यापक बहस को जन्म दे चुका है. सरकार के अपील करने के फैसले के बाद यह कानूनी लड़ाई आगे भी जारी रहने की संभावना है.
फिलहाल, हाईकोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले ने ब्रिटेन की राजनीति और नागरिक अधिकारों की बहस को एक नई दिशा दे दी है.
Source: News Agencies
