By: The Trek News Desk
अंतरराष्ट्रीय सहायता संगठन ऑक्सफैम ने अपनी वार्षिक असमानता रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि दुनिया के अरबपति न सिर्फ पहले से ज़्यादाअमीर हो चुके हैं, बल्कि राजनीति, मीडिया और सोशल मीडिया पर उनका प्रभाव भी तेज़ी से बढ़ता जा रहा है. संगठन के मुताबिक, यह रुझान वैश्विक असमानता को और गहरा कर रहा है.
रविवार को जारी इस रिपोर्ट में बताया गया कि वर्ष 2025 के दौरान अरबपतियों की कुल संपत्ति में करीब 2.5 ट्रिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई, जो दुनिया की आधी आबादी, करीब 4.1 अरब लोगों की कुल संपत्ति के लगभग बराबर है. रिपोर्ट के अनुसार, बीते साल पहली बार दुनिया में 3,000 से अधिक अरबपति दर्ज किए गए और यह भी पहली बार हुआ जब दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क की संपत्ति 500 अरब डॉलर से अधिक पहुंच गई.
ऑक्सफैम की यह रिपोर्ट स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वार्षिक बैठक की शुरुआत के साथ जारी की गई. इस सम्मेलन में हर साल दुनिया के करीब 1,000 सबसे अमीर लोग, बड़े कॉर्पोरेट प्रमुख और राजनीतिक नेता शामिल होते हैं. इस साल बैठक का विषय “संवाद की भावना” रखा गया है, लेकिन ऑक्सफैम का कहना है कि वास्तविकता इसके उलट है.
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमीर वर्ग संचार के साधनों पर लगातार कब्ज़ा करता जा रहा है. उदाहरण के तौर पर अमेज़न के संस्थापक जेफ बेजोस द्वारा द वॉशिंगटन पोस्ट की खरीद, एलन मस्क द्वारा ट्विटर (अब एक्स) का अधिग्रहण, पैट्रिक सून-शियोंग का लॉस एंजेलिस टाइम्स पर नियंत्रण और फ्रांस के अरबपति विंसेंट बोलोरे का न्यूज चैनल सीन्यूज़ का मालिक होना शामिल है.

ऑक्सफैम इंटरनेशनल के कार्यकारी निदेशक अमिताभ बेहर ने कहा कि बेहद अमीर लोगों का राजनीति, अर्थव्यवस्था और मीडिया पर असमान रूप से बढ़ता प्रभाव गरीबी से निपटने की कोशिशों को कमज़ोर कर रहा है. उन्होंने कहा कि सरकारों को आम लोगों की ज़रूरतों, जैसे स्वास्थ्य सेवाएं, जलवायु कार्रवाई और कर व्यवस्था में निष्पक्षता पर ध्यान देना चाहिए.
रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि अरबपति आम नागरिकों की तुलना में 4,000 गुना अधिक राजनीतिक पदों पर पहुंचने की संभावना रखते हैं. वर्ल्ड वैल्यूज़ सर्वे के हवाले से बताया गया कि 66 देशों में किए गए सर्वे में करीब आधे लोगों का मानना है कि उनके देश में अमीर लोग चुनावों को प्रभावित करते हैं.
ऑक्सफैम ने यह भी चिंता जताई कि बीते साल 68 देशों में सरकार विरोधी 142 बड़े प्रदर्शन हुए, जिनमें से कई को बल प्रयोग के ज़रिए दबाया गया. संगठन का कहना है कि सरकारें अमीरों के हितों की रक्षा के लिए आम लोगों के अधिकारों की अनदेखी कर रही हैं, जिससे लोगों का जीवन लगातार महंगा और असहनीय होता जा रहा है.

विश्व आर्थिक मंच के अनुसार, इस वर्ष दावोस बैठक में लगभग 850 शीर्ष सीईओ और चेयरपर्सन शामिल हो रहे हैं, जिनके साथ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और चीन के उप-प्रधानमंत्री हे लिफेंग जैसे वैश्विक नेता भी मौजूद हैं.
राजनीतिक मुद्दों के साथ-साथ ऑक्सफैम एक मानवीय सहायता संगठन भी है, जो दुनिया के कई संकटग्रस्त क्षेत्रों में राहत कार्य करता है. संगठन ने ग़ज़ा में हालात को लेकर भी लगातार चेतावनी दी है और बताया है कि इसराइल द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के चलते वहां गंभीर मानवीय संकट पैदा हो गया है.
Source: News Agencies
