डीजीसीए के भारतीय एयरलाइंस को इथियोपिया ज्वालामुखीय राख वाले क्षेत्रों से दूर रहने के निर्देश

By: The Trek News Desk

इथियोपिया में हैली गुबी (Hayli Gubbi) ज्वालामुखी के प्रकोप के बाद उसकी राख के बादल कई देशों की ओर बढ़ रहे हैं. इसी को देखते हुए भारत के विमानन नियामक डीजीसीए (DGCA) ने सोमवार को सभी भारतीय एयरलाइंस को तत्काल ऑपरेशनल एडवाइजरी जारी की है.

नियामक ने चेतावनी दी है कि ज्वालामुखीय राख से विमान के इंजन और अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों को गंभीर नुकसान पहुँच सकता है और ऐसी स्थिति में उड़ानों को प्रभावित क्षेत्रों से सख्ती से दूर रहना चाहिए.

राख के बादल भारत सहित कई देशों की ओर बढ़े

रिपोर्टों के अनुसार, 10,000 साल बाद फिर से सक्रिय हुए हैली गुबी ज्वालामुखी से उठी राख लगभग 14 किलोमीटर ऊँचाई तक हवा में फैल गई.
ये बादल यमन, ओमान, पाकिस्तान और भारत सहित कई क्षेत्रों की तरफ बढ़ रहे हैं.

सोमवार शाम को राख का कुछ हिस्सा राजस्थान के ऊपर से भारत में प्रवेश कर गया और इसके उत्तर, पूर्व और उत्तर-पूर्व भारत की ओर बढ़ने की संभावना जताई गई है.

कई उड़ानों पर असर, एक विमान डायवर्ट

पश्चिम एशिया के प्रभावित हवाई क्षेत्र की वजह से कुछ उड़ानों को मार्ग बदलना पड़ा.
उदाहरण के तौर पर, कन्नूर–अबू धाबी जा रही इंडिगो की एक उड़ान को अहमदाबाद की ओर मोड़ दिया गया.
कुछ फ्लाइट कैंसिलेशन भी दर्ज किए गए हैं.

ज्वालामुखीय राख क्यों है खतरनाक?

डीजीसीए के अनुसार-

  • राख के कण अत्यंत अभेद्य (abrasive) होते हैं, जो इंजन के ब्लेड को नुकसान पहुँचा सकते हैं.
  • इससे इंजन फेल होने तक की स्थिति बन सकती है.
  • विमान के बाहरी ढांचे, सेंसर और कॉकपिट इंस्ट्रूमेंट्स को भी भारी क्षति हो सकती है.

एयरलाइंस को विस्तृत दिशा-निर्देश

डीजीसीए ने जारी सलाह में एयरलाइंस से कहा है कि वे:

  • उड़ान मार्ग, योजना और ईंधन प्रबंधन को राख की स्थिति के अनुसार समायोजित करें.
  • किसी भी संदिग्ध राख-संपर्क की तत्काल रिपोर्ट करें, खासतौर पर इंजन प्रदर्शन में बदलाव, केबिन में धुआँ या गंध जैसी स्थितियों में.
  • प्रभावित क्षेत्रों के पास उड़ान भरने वाले विमानों के पोस्ट-फ्लाइट इंजन और एयरफ्रेम निरीक्षण अनिवार्य रूप से कराएँ.
  • यदि स्थिति बिगड़ती है तो एयरपोर्ट संचालन स्थगित या सीमित करने पर विचार करें.

मौसम और सैटेलाइट डेटा पर लगातार नज़र रखने के निर्देश

फ्लाइट डिस्पैच टीमों को कहा गया है कि वे:

  • ज्वालामुखीय राख से जुड़ी वैश्विक एडवाइजरीज़,
  • सैटेलाइट इमेजरी,
  • मौसम विभाग के आंकड़े और
  • राख के प्रसार के पूर्वानुमान
    को लगातार मॉनिटर करें.

अगर किसी एयरपोर्ट पर राख जमती है तो रनवे, टैक्सीवे और एप्रन की तुरंत जांच व सफाई अनिवार्य बताई गई है.

Source: News Agencies

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