By: The Trek News Desk
मेडागास्कर में हालिया सैन्य विद्रोह के बाद, सेना प्रमुख कर्नल माइकल रैंड्रियनिरीना ने घोषणा की है कि वह शुक्रवार को देश के नए राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे. यह घोषणा अफ्रीकी संघ (AU) की ओर से मेडागास्कर की सदस्यता को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के बावजूद सामने आई है.
कर्नल रैंड्रियनिरीना का यह कदम देश को एक गहरे संवैधानिक संकट की ओर धकेल सकता है, क्योंकि पूर्व राष्ट्रपति एंड्री राजोएलिना अब तक औपचारिक रूप से अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया है. उन्होंने पहले ही संसद को भंग करने के आदेश जारी कर दिए थे और सेना पर सत्ता हथियाने की साज़िश रचने का आरोप लगाया था.
सेना ने संभाली सत्ता, राजोएलिना देश छोड़कर फरार
पिछले सप्ताह सेना ने राष्ट्रपति भवन पर नियंत्रण कर लिया, जिससे राष्ट्रपति एंड्री राजोएलिना को देश छोड़कर जाना पड़ा. बुधवार रात को दिए गए एक आधिकारिक बयान में कहा गया, “कर्नल माइकल रैंड्रियनिरीना शुक्रवार को मेडागास्कर गणराज्य के पुनर्निर्माण के राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे. यह शपथ समारोह उच्च संवैधानिक न्यायालय की उपस्थिति में आयोजित किया जाएगा.”
राजोएलिना ने समाचार एजेंसी एएफपी को दिए बयान में खुलासा किया कि 11-12 अक्टूबर के बीच उन्हें “राष्ट्रपति की जान को गंभीर खतरे” की सूचना मिली, जिसके बाद उन्होंने देश छोड़ दिया. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें रविवार को फ्रांस की एक सैन्य विमान के जरिए बाहर निकाला गया. सोमवार को उन्होंने कहा कि वे “सुरक्षित स्थान” पर हैं, लेकिन उन्होंने वापसी की संभावना पर चुप्पी साध रखी है.

दो साल तक चलेगा सैन्य शासित संक्रमण काल
कर्नल रैंड्रियनिरीना ने कहा कि नई व्यवस्था के तहत सभी संवैधानिक संस्थाओं को भंग कर दिया गया है, केवल राष्ट्रीय विधानसभा को छोड़कर. उन्होंने आगे बताया कि सेना के नेतृत्व में एक विशेष समिति देश की अंतरिम सरकार के साथ मिलकर अगले दो वर्षों तक शासन करेगी और फिर नए चुनाव आयोजित कराए जाएंगे.
यह बदलाव ऐसे समय पर हुआ है जब देश में पानी और बिजली की भारी किल्लत को लेकर “जेन-ज़ी” नामक युवा आंदोलन तेज़ हो गया था. विरोध प्रदर्शन कई हफ्तों तक जारी रहे और हिंसा में कई लोगों की जान भी गई, जिसे अब तक की सबसे गंभीर राजनीतिक चुनौती माना जा रहा है.
2009 में भी रैंड्रियनिरीना रहे थे तख्तापलट में शामिल
कर्नल माइकल रैंड्रियनिरीना मेडागास्कर की सेना की विशेष इकाई CAPSAT के कमांडर रहे हैं, जिसने 2009 में हुए तख्तापलट में अहम भूमिका निभाई थी, उसी तख्तापलट से एंड्री राजोएलिना सत्ता में आए थे. लेकिन इस बार रैंड्रियनिरीना ने राजोएलिना से दूरी बना ली और सैनिकों से आह्वान किया कि वे प्रदर्शनकारियों पर गोली न चलाएं.
अफ्रीकी संघ की सख्त प्रतिक्रिया
सत्तापलट के जवाब में अफ्रीकी संघ ने बुधवार को मेडागास्कर की सदस्यता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया. संघ ने स्पष्ट रूप से कहा कि देश में नागरिक शासन की बहाली और जल्द चुनाव आवश्यक हैं. 55 सदस्यीय इस संगठन का निर्णय मेडागास्कर के नए सैन्य नेतृत्व को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग कर सकता है.
मेडागास्कर अब उन कई फ्रांसीसी उपनिवेश रहे अफ्रीकी देशों में शामिल हो गया है, जहां 2020 के बाद से सैन्य शासन स्थापित हुआ है, वहीं माली, बुर्किना फासो, गिनी, नाइजर और गाबोन जैसे देशों में पहले ही तख्तापलट हो चुका है.

क्या लोकतंत्र की वापसी होगी?
अब सवाल यह है कि क्या मेडागास्कर जल्द ही लोकतांत्रिक शासन की ओर लौटेगा या सेना लंबे समय तक सत्ता में बनी रहेगी. कर्नल रैंड्रियनिरीना का कहना है कि यह संक्रमणकालीन सरकार जनता के हित में कार्य करेगी और स्थिति सामान्य होते ही चुनाव कराए जाएंगे.
दूसरी ओर, राजोएलिना की चुप्पी और AU की चेतावनियों के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब मेडागास्कर की राजनीतिक दिशा पर टिकी हैं.
Source: News Agencies
