By: The Trek News Desk
सूडान के दारफूर क्षेत्र में तबाही का नया अध्याय खुल गया है. रैपिड सपोर्ट फोर्सेस (RSF) द्वारा उत्तर दारफूर की राजधानी एल-फाशर पर कब्ज़ा करने के बाद हज़ारों लोग लापता हैं, जबकि भागकर निकले नागरिक हत्या, बलात्कार और अत्याचार की भयावह कहानियाँ सुना रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र (UN) और अंतरराष्ट्रीय राहत एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि एल-फाशर में फँसे नागरिकों की स्थिति “अमानवीय और चिंताजनक” है. यह शहर 18 महीनों की घेराबंदी के बाद रविवार को RSF के हाथों गिर गया, जो दारफूर क्षेत्र में सूडानी सेना का आख़िरी मज़बूत ठिकाना था.
“मेरे साथ पढ़ने वाले ने जान बचाई, बाकी सबको मार दिया”
एल-फाशर से भागने में सफल 27 वर्षीय अलख़ैर इस्माइल ने बताया कि जब वह और 300 अन्य लोग शहर छोड़ने की कोशिश कर रहे थे, तब RSF के लड़ाकों ने उन्हें रोक लिया.
“उनमें से एक लड़का मुझे खार्तूम यूनिवर्सिटी से पहचानता था. उसने कहा, ‘इसे मत मारो’. फिर उन्होंने मेरे बाकी साथियों को गोली मार दी,” इस्माइल ने बताया.
तविला नामक कस्बे में पहुँचे अन्य लोगों ने भी इसी तरह के भयावह अनुभव साझा किए. तहानी हसन ने बताया, “वे अचानक सामने आ गए, तीन जवान लड़के थे, उन्होंने हवा में गोली चलाई और कहा ‘रुको’. उन्होंने हमें मारा, हमारे कपड़े फेंक दिए. मुझे भी तलाशी ली गई.”

“कई लोग फिरौती के लिए बंदी बनाए गए”
डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (MSF) के अनुसार, एल-फाशर से रविवार से बुधवार के बीच 62,000 से अधिक लोग भागे, लेकिन केवल 5,000 ही तविला तक पहुँच पाए.
MSF के आपात प्रमुख मिशेल ओलिवियर लाचारिते ने कहा, “रोगियों के बयान बताते हैं कि बाकी लोग रास्ते में या तो मारे जा रहे हैं, रोके जा रहे हैं या उनका शिकार किया जा रहा है.”
MSF के अनुसार, 27 अक्टूबर को तविला पहुँचे 70 बच्चों में से हर बच्चा पाँच वर्ष से कम उम्र का और गंभीर कुपोषण से पीड़ित था. उनमें से 57 प्रतिशत ‘सीवियर एक्यूट मालन्यूट्रिशन’ से जूझ रहे थे.
संगठन के अनुसार, RSF सैनिक लिंग, उम्र और जातीय पहचान के आधार पर लोगों को अलग कर रहे हैं. कई को 5 लाख से 30 लाख सूडानी पाउंड (8,000–50,000 अमेरिकी डॉलर) तक की फिरौती के लिए बंदी बनाया गया है.
अस्पताल में नरसंहार: 460 लोगों की मौत
UNFPA (संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष) ने पुष्टि की कि 29 अक्टूबर को एल-फाशर मातृत्व अस्पताल में RSF सैनिकों द्वारा कम से कम 460 लोगों की हत्या की गई.
मरने वालों में मरीज़, डॉक्टर, विस्थापित नागरिक और आगंतुक शामिल थे. एजेंसी का कहना है कि वास्तविक मौत का आंकड़ा इससे कहीं अधिक हो सकता है.
एक 24 वर्षीय युवक ने बताया कि 200 लोगों के समूह में से सिर्फ़ वे चार लोग बचे, जिन्होंने फिरौती दी थी, “बाकियों को एक-एक गोली मार दी गई.”
एक 26 वर्षीय महिला ने कहा कि “मेरे पति ने मेरी और बच्चों की जान बचाने के लिए फिरौती दी, लेकिन उन्हें हमारी आँखों के सामने मार दिया गया.”

उत्तर कोरडोफान में भी हिंसा की लपटें
एल-फाशर से लगभग 300 किलोमीटर दूर उत्तर कोरडोफान राज्य में भी हालात बिगड़ रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि 36,000 से अधिक लोग बारा इलाके से भागे, जिस पर RSF ने पिछले हफ्ते कब्ज़ा किया.
UN प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने बताया कि बारा शहर में “रेड क्रेसेंट के पाँच स्वयंसेवकों की सामूहिक हत्या” और “यौन हिंसा” के मामलों की पुष्टि हुई है.
सूडान डॉक्टर नेटवर्क के प्रवक्ता मोहम्मद एलशेख ने कहा कि बारा से एल-उबैद शहर तक का रास्ता “बेहद खतरनाक और निर्जन है, दिन में तेज़ गर्मी और रात में कड़ाके की ठंड.”
पिछले जुलाई में भी RSF लड़ाकों ने उत्तर कोरडोफान के कई गाँवों पर हमला कर 300 लोगों की हत्या की थी, जिनमें बच्चे और गर्भवती महिलाएँ शामिल थीं.
“दुनिया को अब कदम उठाना होगा”
संयुक्त राष्ट्र और राहत एजेंसियों ने अमेरिका, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और मिस्र जैसे मध्यस्थ देशों से हस्तक्षेप की अपील की है.मानवाधिकार समूहों का कहना है कि RSF और सूडानी सेना दोनों ही युद्ध अपराधों के आरोपों का सामना कर रहे हैं. यह संघर्ष अब तक दसियों हज़ार लोगों की जान ले चुका है और 1.4 करोड़ से अधिक लोगों को विस्थापित कर चुका है.
सूडान अब दुनिया के सबसे गंभीर मानवीय संकटों में से एक बन चुका है, जहाँ भूख, बीमारी और हिंसा ने जीवन के हर पहलू को निगल लिया है.
Source: News Agencies
