By: The Trek News Desk
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (4 दिसंबर 2025) को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ चल रही कार्यवाही पर लगी अंतरिम रोक को बढ़ाकर 22 अप्रैल 2026 तक कर दिया. यह मामला 2022 की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान सेना के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी से जुड़ा है.
जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने राहुल गांधी की उस अपील को स्वीकार कर लिया, जिसमें उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट के 29 मई के आदेश को चुनौती दी थी. हाई कोर्ट ने उनके विरुद्ध जारी समन को रद्द करने से इनकार कर दिया था.
सुप्रीम कोर्ट पहले ही रोक लगा चुका है
इस मामले में 4 अगस्त को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ की ट्रायल कोर्ट में चल रही आगे की कार्यवाही पर अस्थायी रोक लगा दी थी. कोर्ट ने अब वही स्टे आदेश अप्रैल 2026 तक बढ़ा दिया है.
बेंच की तीखी टिप्पणियाँ
पहली सुनवाई के दौरान शीर्ष न्यायालय ने राहुल गांधी से उनके कथित बयान पर सवाल उठाए थे. कोर्ट ने कहा था, “आपको कैसे पता चला कि चीन ने 2,000 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र पर कब्जा कर लिया? क्या आपके पास कोई विश्वसनीय सामग्री है? बिना प्रमाण ऐसे बयान क्यों देते हैं? अगर आप सही मायने में भारतीय हैं, तो इस तरह की बातें नहीं कहेंगे.”
कोर्ट ने इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार और शिकायतकर्ता को नोटिस जारी कर उनके जवाब तलब किए थे.

राहुल गांधी की दलील
वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत को बताया कि विपक्ष के नेता को मुद्दों को उठाने से रोका जाना दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति होगी.
उन्होंने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita) की धारा 223 का हवाला दिया और कहा कि किसी भी आपराधिक शिकायत पर संज्ञान लेने से पहले आरोपी को सुनना “अनिवार्य” है, जबकि इस मामले में ऐसा नहीं हुआ.
क्या है मामला
लखनऊ के शिकायतकर्ता उदय शंकर श्रीवास्तव ने आरोप लगाया है कि दिसंबर 2022 की यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने भारत-चीन सीमा पर हुई झड़पों के संदर्भ में भारतीय सेना के बारे में “अपमानजनक टिप्पणी” की थी.
ट्रायल कोर्ट ने इन आरोपों के आधार पर राहुल गांधी को मानहानि (defamation) के मामले में समन जारी किया था.
उनके वकील प्रंशु अग्रवाल ने तर्क दिया कि शिकायत की सामग्री को पढ़ने से ही यह स्पष्ट है कि आरोप “बनावटी” प्रतीत होते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी लखनऊ के निवासी नहीं हैं, इसलिए समन जारी करने से पहले अदालत को आरोपों की प्राथमिक जांच करनी चाहिए थी.
Source: News Agencies
