By: The Trek News Desk
अमेरिका ने सीरिया में इस्लामिक स्टेट (आईएस) के खिलाफ एक बड़े सैन्य अभियान को अंजाम दिया है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार, यह कार्रवाई हाल ही में अमेरिकी बलों पर हुए घातक हमले के जवाब में की गई, जिसमें दो अमेरिकी सैनिकों और एक नागरिक की मौत हुई थी.
सेंटकॉम ने बताया कि ऑपरेशन “हॉकआई स्ट्राइक” के तहत लड़ाकू विमानों, अटैक हेलीकॉप्टरों और तोपखाने की मदद से केंद्रीय सीरिया में 70 से अधिक आईएस ठिकानों को निशाना बनाया गया. इस अभियान में 100 से ज्यादा सटीक हथियारों का इस्तेमाल किया गया. कार्रवाई में जॉर्डन के विमानों ने भी सहयोग किया.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि आईएस के ठिकानों पर “बहुत कड़ी कार्रवाई” की जा रही है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिका उन आतंकियों के खिलाफ सख्त जवाब दे रहा है जिन्होंने अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाया. ट्रंप ने यह भी दावा किया कि इस अभियान को सीरियाई सरकार का समर्थन हासिल है.
सेंटकॉम के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि अमेरिका क्षेत्र में अपने नागरिकों और साझेदारों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने वाले आतंकियों का लगातार पीछा करता रहेगा. वहीं, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इसे युद्ध की शुरुआत नहीं, बल्कि आतंक के खिलाफ कड़ा संदेश बताया.
यूके स्थित सीरियन ऑब्ज़र्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स के अनुसार, रक्का और दीर एज़-ज़ोर के पास आईएस के ठिकानों को निशाना बनाया गया, जहां एक प्रमुख आईएस नेता समेत कई लड़ाके मारे गए. हालांकि, आईएस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है और लक्ष्यों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.
इससे पहले, पालमायरा में अमेरिकी बलों पर हुए हमले में एक आईएस हमलावर के शामिल होने की बात कही गई थी, जिसे बाद में मार गिराया गया. हमले में तीन अन्य अमेरिकी सैनिक घायल भी हुए थे. हमले के पीछे किस संगठन का हाथ है, इस पर अलग-अलग दावे सामने आए हैं.
गौरतलब है कि 2019 में आईएस के सीरिया में आखिरी इलाकों के खत्म होने की घोषणा की गई थी, लेकिन संयुक्त राष्ट्र के अनुसार आज भी सीरिया और इराक में आईएस के 5,000 से 7,000 लड़ाके सक्रिय हैं. अमेरिका 2015 से सीरिया में आईएस विरोधी अभियान के तहत अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए हुए है.
हाल के महीनों में सीरिया ने अंतरराष्ट्रीय आईएस विरोधी गठबंधन में सक्रिय भूमिका निभाने और अमेरिका के साथ सहयोग बढ़ाने का संकेत दिया है. नवंबर में सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरा की वॉशिंगटन यात्रा को दोनों देशों के बीच “नए दौर” की शुरुआत बताया गया था.
Source: News Agencies

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