सीजेआई पर जूता फेंकने वाले वकील राकेश किशोर की सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन से सदस्यता रद्द

By: The Trek News Desk

सुप्रीम कोर्ट में 6 अक्टूबर को कार्यवाही के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश बी.आर गवई पर जूता फेंकने वाले अधिवक्ता राकेश किशोर की सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की अस्थायी सदस्यता गुरुवार को रद्द कर दी गई. बार एसोसिएशन ने इस कृत्य को “गंभीर अनुशासनहीनता” बताते हुए कहा कि यह न्यायपालिका की गरिमा और पेशेवर नैतिकता का साफ उल्लंघन है.

यह कदम उस घटना के कुछ दिन बाद उठाया गया है जब बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने 71 वर्षीय वकील राकेश किशोर को भारत में किसी भी अदालत, न्यायाधिकरण या प्राधिकरण में वकालत करने से अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया था. किशोर पर अनुशासनात्मक कार्यवाही भी शुरू की गई है और उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.

न्यायपालिका पर सीधा हमला”: SCBA का बयान

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) कार्यकारी समिति ने अपने बयान में कहा, “इस प्रकार का निंदनीय, असंयमित और अव्यवस्थित व्यवहार एक कोर्ट अधिकारी के लिए पूरी तरह से अनुचित है. यह सुप्रीम कोर्ट की गरिमा, पेशेवर आचरण और बार एवं बेंच के बीच सम्मानजनक संबंधों के खिलाफ है.”

समिति ने आगे कहा, “यह घटना न केवल अदालत की कार्यवाही की पवित्रता को ठेस पहुंचाती है, बल्कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर भी सीधा हमला है.”

समिति ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि राकेश किशोर की सदस्यता जारी रखना बार एसोसिएशन की प्रतिष्ठा और अनुशासन के विरुद्ध होगा. इसी के तहत, उनकी 27 जुलाई 2011 को जारी अस्थायी सदस्यता संख्या K-01029/RES को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है और उनका नाम एसोसिएशन की सदस्य सूची से हटा दिया गया है.

अदालत में हंगामे के बाद विवाद गहराया

घटना के अगले ही दिन, राकेश किशोर ने समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में दावा किया कि उन्होंने यह कदम “दिव्य शक्तियों के निर्देश” पर उठाया. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अपने कार्य पर कोई पछतावा नहीं है और आरोप लगाया कि 16 सितंबर को दायर की गई एक याचिका पर CJI की टिप्पणी से वे आहत हुए थे.

बताया जा रहा है कि यह याचिका मध्य प्रदेश के खजुराहो मंदिर परिसर में भगवान विष्णु की मूर्ति की पुनर्स्थापना से संबंधित थी, जिस पर CJI गवई की टिप्पणी से वकील नाराज़ थे.

दिल्ली पुलिस ने तीन घंटे पूछताछ के बाद छोड़ा

घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने राकेश किशोर से लगभग तीन घंटे तक पूछताछ की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा आधिकारिक शिकायत दर्ज न कराने के कारण उन्हें छोड़ दिया गया.

एससी में एंट्री कार्ड भी रद्द करने की मांग

SCBA ने सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी-जनरल को पत्र भेजकर मांग की है कि राकेश किशोर को जारी किया गया प्रॉक्सिमिटी एक्सेस कार्ड भी तुरंत रद्द किया जाए, ताकि उन्हें परिसर में प्रवेश की अनुमति न दी जाए.

न्यायपालिका की गरिमा सर्वोपरि”: एसोसिएशन

SCBA ने दोहराया कि वह न्यायपालिका की गरिमा, विधि व्यवसाय की मर्यादा और संविधान में निहित मूल्यों, जैसे अनुशासन, सम्मान और स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है.

यह घटना देश की सर्वोच्च अदालत की गरिमा पर एक बड़ा सवाल बनकर उभरी है, और कानूनी समुदाय ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है.

Source: News Agencies

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