By: The Trek News Desk
वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो को वर्ष 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया है. नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी ने शुक्रवार को घोषणा करते हुए कहा कि यह सम्मान मचाडो को “वेनेजुएला के लोगों के लिए लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और तानाशाही से शांतिपूर्ण बदलाव के संघर्ष में उनके अथक प्रयासों” के लिए दिया गया है.
नोबेल समिति के अध्यक्ष जॉर्गन वाटने फ्राइडनेस ने ओस्लो में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पिछले एक वर्ष से मचाडो छिपकर रह रही हैं, लेकिन गंभीर जानलेवा खतरों के बावजूद उन्होंने देश नहीं छोड़ा. “उनका यह साहस लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है. उन्होंने विपक्षी दलों को एकजुट किया और सैन्यीकरण के खिलाफ लगातार आवाज़ उठाई,” समिति के बयान में कहा गया.
लोकतांत्रिक परिवर्तन की प्रतीक बनकर उभरीं मचाडो
सरकारी दमन, धमकियों और राजनीतिक अयोग्यता झेलने के बावजूद मचाडो ने शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक बदलाव की राह नहीं छोड़ी. उनका नेतृत्व वेनेजुएला में नागरिक अधिकारों और स्वतंत्रता की नई उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है.
नोबेल सप्ताह की झलक
इस वर्ष के नोबेल पुरस्कारों की शुरुआत 6 अक्टूबर को चिकित्सा के क्षेत्र से हुई थी. इसके बाद 7 अक्टूबर को भौतिकी, 8 अक्टूबर को रसायन विज्ञान, और 9 अक्टूबर को साहित्य के विजेताओं की घोषणा हुई. अब 13 अक्टूबर को अर्थशास्त्र के पुरस्कार विजेता का नाम घोषित किया जाएगा.
सभी विजेताओं को 11 मिलियन स्वीडिश क्रोनर (लगभग 9.3 करोड़ रुपये) की धनराशि और स्वर्ण पदक 10 दिसंबर को अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि पर प्रदान किए जाएंगे.
नोबेल पुरस्कार की प्रक्रिया और चयन
नॉर्वेजियन नोबेल संस्थान के अनुसार, इस वर्ष शांति पुरस्कार के लिए कुल 338 उम्मीदवारों– जिनमें 244 व्यक्ति और 94 संगठन शामिल थे, पर विचार किया गया. चयन प्रक्रिया जनवरी से शुरू होकर अगस्त-सितंबर में पूरी होती है. अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से या बहुमत के आधार पर लिया जाता है.
समिति के प्रमुख फ्राइडनेस ने कहा, “हर साल कई नेता खुद को इस पुरस्कार के योग्य बताते हैं, लेकिन हम केवल उन सिद्धांतों पर ध्यान देते हैं जो अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत की भावना के अनुरूप हों, यानी शांति, निरस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना.”
अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत की भावना
नोबेल पुरस्कारों की नींव 1895 में स्वीडिश वैज्ञानिक और उद्योगपति अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत से पड़ी थी. इसमें साहित्य, रसायन, भौतिकी, चिकित्सा और शांति के क्षेत्र में मानवता के उत्थान के लिए योगदान देने वालों को सम्मानित करने की व्यवस्था की गई थी.

पिछले वर्ष का विजेता और वैश्विक दृष्टिकोण
2024 में यह पुरस्कार जापानी संगठन निहोन हिदानक्यो को दिया गया था, यह हिरोशिमा और नागासाकी परमाणु बम हमलों के बचे लोगों का समूह है, जिसने दशकों तक निरस्त्रीकरण और शांति की वकालत की.
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और विवादों की पृष्ठभूमि
कुछ नेताओं, जैसे कि डोनाल्ड ट्रंप, ने इस पुरस्कार को पाने की अपनी इच्छा सार्वजनिक रूप से व्यक्त की थी, जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की नीतियां- जैसे विश्व स्वास्थ्य संगठन और पेरिस जलवायु समझौते से बाहर निकलना, नोबेल की वसीयत की मूल भावना के विपरीत थीं.
पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट ओस्लो की निदेशक नीना ग्रेगर ने कहा, “नोबेल की वसीयत तीन सिद्धांतों पर आधारित है- शांति समझौते को प्रोत्साहन देना, निरस्त्रीकरण को बढ़ावा देना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना.”
Source: News Agencies
