By: The Trek News Desk
मोबाइल फ़ोन में साइबर सुरक्षा ऐप Sanchar Saathi को अनिवार्य रूप से प्री-इंस्टॉल करने के फैसले पर देशभर में उठे विरोध के बाद केंद्र सरकार ने बुधवार को यह आदेश वापस ले लिया. डिजिटल अधिकार समूहों और विपक्षी दलों ने इसे निजता से छेड़छाड़ और निगरानी बढ़ने की आशंका बताकर कड़ा विरोध जताया था.
कुछ दिनों पहले ही लागू हुआ था आदेश
दूरसंचार विभाग (DoT) ने 1 दिसंबर को एक अधिसूचना जारी की थी, जिसके तहत मार्च 2026 से सभी स्मार्टफ़ोन निर्माताओं को यह ऐप अनिवार्य रूप से इंस्टॉल करके ही नए फ़ोन बाजार में उतारने थे. विभाग ने तर्क दिया था कि डुप्लीकेट या फर्जी IMEI वाले उपकरण राष्ट्रीय दूरसंचार सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे हैं और Sanchar Saathi इस समस्या पर लगाम लगाने में मदद करेगा.
सरकार का यू-टर्न: ‘तेजी से बढ़ती लोकप्रियता’ बताई वजह
तेज़ विरोध के बीच सरकार ने बुधवार को आदेश वापस लेने की घोषणा की. प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया कि ऐप की लोकप्रियता खुद-ब-खुद इतनी बढ़ गई है कि मजबूरी की आवश्यकता ही नहीं रही.
सरकार के अनुसार, आदेश सामने आने के बाद सिर्फ एक दिन में 6 लाख नए उपयोगकर्ताओं ने पंजीकरण किया, जो सामान्य दर की तुलना में दस गुना ज्यादा है.
विज्ञप्ति में कहा गया: “Sanchar Saathi के प्रति बढ़ती स्वीकार्यता को देखते हुए मोबाइल निर्माताओं के लिए प्री-इंस्टॉलेशन को अब अनिवार्य नहीं किया जाएगा.”
2023 में लॉन्च हुआ यह ऐप अब तक 1.4 करोड़ उपयोगकर्ताओं तक पहुंच चुका है, और रोज़ाना लगभग 2,000 साइबर धोखाधड़ी रिपोर्ट दर्ज होती हैं.
निजता पर खतरे के आरोप, विपक्ष ने जताई चिंता
अनिवार्य इंस्टॉलेशन की घोषणा के बाद डिजिटल अधिकार संगठनों और विपक्षी दलों ने इसे नागरिक स्वतंत्रता और गोपनीयता के खिलाफ बताया था. आलोचकों का कहना था कि किसी भी सरकारी ऐप को अनिवार्य करना निगरानी बढ़ाने की दिशा में खतरनाक मिसाल बन सकता है.
वहीं सरकार ने अपनी सफ़ाई में कहा कि ऐप पूरी तरह सुरक्षित है और, “सिर्फ साइबर अपराधियों से नागरिकों की सुरक्षा के लिए बनाया गया है, इसके अलावा इसका कोई और उद्देश्य नहीं है.”
अधिकारी यह भी स्पष्ट कर चुके हैं कि उपयोगकर्ता चाहें तो ऐप को कभी भी अनइंस्टॉल कर सकते हैं.
नीतिगत यू-टर्न से सरकार ने विवाद को शांत करने का प्रयास किया है. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रकरण देश में डेटा सुरक्षा, निगरानी और डिजिटल अधिकारों पर लगातार बढ़ रही बहस को एक बार फिर तेज़ कर गया है.
Source: News Agencies
