विरोध और हंगामे के बीच लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित

By: The Trek News Desk

लोकसभा ने गुरुवार (5 फरवरी 2026) को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को पारित कर दिया, लेकिन इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का परंपरागत जवाब सदन में नहीं हो सका. विपक्ष के तीखे विरोध और लगातार नारेबाज़ी के बीच यह प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित किया गया.

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सबसे पहले धन्यवाद प्रस्ताव पर विपक्ष द्वारा लाए गए संशोधनों को मत के लिए रखा, जिन्हें सदन ने खारिज कर दिया. इसके बाद अध्यक्ष ने 28 जनवरी को संसद के दोनों सदनों को दिए गए राष्ट्रपति के अभिभाषण के लिए धन्यवाद प्रस्ताव पढ़कर सुनाया, जिसे हंगामे के बीच पारित घोषित कर दिया गया. बढ़ते शोर-शराबे के कारण अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी.

सरकार और विपक्ष के बीच जारी गतिरोध के बीच कांग्रेस ने इस घटनाक्रम की तुलना वर्ष 2004 से की. कांग्रेस ने याद दिलाया कि 10 जून 2004 को तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को भी भारतीय जनता पार्टी के विरोध के चलते राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देने से रोका गया था.

कांग्रेस महासचिव (संचार प्रभारी) जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर 10 मार्च 2005 का एक वीडियो साझा किया, जिसमें डॉ. मनमोहन सिंह अपने संबोधन के दौरान यह उल्लेख करते हैं कि उन्हें यह अवसर पाने के लिए पूरे एक साल का इंतज़ार करना पड़ा था. रमेश ने कहा कि सिंह ने उस भाषण में राष्ट्रपति के पिछले और वर्तमान दोनों अभिभाषणों के लिए आभार जताया था.

इससे एक दिन पहले, बुधवार (4 फरवरी 2026) को लोकसभा में उस समय असाधारण दृश्य देखने को मिले जब महिला विपक्षी सांसद हाथों में बैनर लेकर प्रधानमंत्री की सीट की ओर बढ़ीं. इस दौरान सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित करनी पड़ी.

उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन में मौजूद नहीं थे और भाजपा सांसद पी.पी. चौधरी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोल रहे थे. सरकार के सदन प्रबंधकों ने संकेत दिया था कि प्रधानमंत्री शाम 5 बजे चर्चा का जवाब देंगे.

हालांकि, कई बार स्थगन के बाद जब कार्यवाही दोबारा शुरू हुई और पीठासीन सदस्य संध्या राय ने चौधरी को बोलने के लिए आमंत्रित किया, तभी विपक्षी महिला सांसद वेल में पहुंच गईं. उनका विरोध अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते और पूर्व थलसेनाध्यक्ष एम.एम. नरवणे की ‘अप्रकाशित’ पुस्तक को लेकर था.

जैसे ही विपक्षी सदस्य प्रधानमंत्री की सीट के पास पहुंचे, पीठासीन अधिकारी ने कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी.

इन घटनाओं के बीच राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव तो पारित हो गया, लेकिन संसद की परंपरा के अनुसार प्रधानमंत्री का जवाब इस बार सदन में नहीं आ सका, जिससे सियासी टकराव और गहरा गया है.

Source: News Agencies

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