By: The Trek News Desk
लोकसभा में लगातार हंगामे और कार्यवाही के बार-बार स्थगित होने के बीच कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया. इस घटनाक्रम के बाद निचले सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई.
कांग्रेस के लोकसभा मुख्य सचेतक, के. सुरेश और पार्टी के सचेतक मोहम्मद जावेद अहमद ने यह प्रस्ताव लोकसभा के महासचिव उत्पल कुमार सिंह को सौंपा. सूत्रों के अनुसार, यह प्रस्ताव संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत दिया गया है, जिसके अनुसार अध्यक्ष को हटाने के लिए कम से कम 14 दिन पहले लिखित सूचना देना ज़रूरी होता है.
प्रस्ताव सौंपने के बाद कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि विपक्ष की सबसे बड़ी चिंता यह रही है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को कई मौकों पर बोलने का अवसर नहीं दिया गया. उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल कांग्रेस तक सीमित नहीं है, बल्कि कई विपक्षी दल इस पर एकमत हैं. गोगोई ने बताया कि दोपहर 1 बजकर 14 मिनट पर अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव औपचारिक रूप से जमा किया गया.
लोकसभा अध्यक्ष को हटाने की मांग वाले इस प्रस्ताव पर कुल 119 सांसदों के हस्ताक्षर हैं. इसमें डीएमके के टी.आर. बालू, समाजवादी पार्टी की डिंपल यादव, आरजेडी, वाम दलों समेत कई विपक्षी दल शामिल हैं. हालांकि तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं.
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी इस प्रस्ताव पर दस्तखत नहीं किया. बताया गया है कि प्रस्ताव में शामिल एक आरोप सीधे तौर पर उन्हें सदन में बोलने की अनुमति न मिलने से जुड़ा हुआ है, इसी कारण उन्होंने स्वयं को इस प्रक्रिया से अलग रखा.
कांग्रेस ने लोकसभा अध्यक्ष पर आरोप लगाया है कि उन्होंने सदन की कार्यवाही के दौरान पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया और राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की बहस के दौरान राहुल गांधी को बोलने का मौका नहीं दिया.

हाल ही में अध्यक्ष द्वारा कथित अनुशासनहीनता के आरोप में आठ विपक्षी सांसदों को निलंबित किया गया था, जिनमें से सात कांग्रेस के थे. प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि एक सत्ताधारी दल के सांसद द्वारा दो पूर्व प्रधानमंत्रियों पर व्यक्तिगत टिप्पणियां किए जाने के बावजूद उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, जबकि विपक्ष ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई थी.
अविश्वास प्रस्ताव में लोकसभा अध्यक्ष के उस बयान पर भी गंभीर आपत्ति जताई गई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके पास “ठोस जानकारी” है कि कुछ कांग्रेस सांसद प्रधानमंत्री की सीट की ओर बढ़ सकते हैं और कोई “अप्रत्याशित कदम” उठा सकते हैं. विपक्ष ने इसे संवैधानिक पद की मर्यादा के दुरुपयोग के रूप में बताया है.
इससे पहले सोमवार को कांग्रेस की आठ महिला सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि उन्हें केवल इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों का विरोध करती रही हैं और उनसे जवाबदेही की मांग कर रही हैं.
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर वर्ष 1954 का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय लोकसभा में तत्कालीन अध्यक्ष जी.वी. मावलंकर को हटाने से जुड़े प्रस्ताव पर चर्चा हुई थी. उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू के उस वक्त के बयान को उद्धृत किया, जिसमें विपक्ष को सरकार की तुलना में अधिक समय देने की बात कही गई थी.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम लोकसभा में बढ़ते टकराव और विपक्ष की एकजुट रणनीति का संकेत है. आने वाले दिनों में इस प्रस्ताव पर आगे की प्रक्रिया और उसके राजनीतिक असर पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी.
Source: News Agencies
