रुपया फिर फिसला: डॉलर के मुकाबले 90.43 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर

By: The Trek News Desk

भारतीय रुपया गुरुवार को एक बार फिर दबाव में आया और शुरुआती कारोबार में 90.43 प्रति डॉलर तक गिर गया, जो अब तक का सबसे कमज़ोर स्तर है. भारत–अमेरिका व्यापार समझौते में देरी और लगातार जारी FPI (विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों) की बिकवाली ने बाज़ार की धारणा को और खराब किया है.

कमजोर शुरुआत, नई गिरावट

पिछले सत्र के 99.19 के मुकाबले रुपया 17 पैसे कमजोर होकर 99.36 पर खुला. इसके कुछ ही समय बाद मुद्रा ने तेज गिरावट के साथ 90.43 का नया निचला स्तर छू लिया.

मुद्रा बाजार विश्लेषकों के अनुसार, USD/INR जोड़ी अभी भी मजबूत ऊपर की ओर रुझान वाले चैनल में बनी हुई है. कई विशेषज्ञों ने संकेत दिया है कि 90.30–90.40 के ऊपर टिकाव मिला तो जोड़ी 90.50 से 91.00 की ओर बढ़ सकती है, जबकि ऊपर की सीमा न टूटने पर बाजार में हल्की वापसी देखी जा सकती है.

FPI बिकवाली से दबाव बढ़ा

इस वर्ष अब तक एफपीआई ने भारतीय शेयरों में से 1.52 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की है. दिसंबर के पहले तीन दिनों में ही वे 8,369 करोड़ रुपये की निकासी कर चुके हैं.
विश्लेषकों का कहना है कि लगातार पूंजी निकलने से रुपये पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है.

CR Forex के प्रबंध निदेशक अमित पबारी के अनुसार, “कमजोर मुद्रा वैश्विक निवेशकों को आकर्षित नहीं करती. जब निकासी बढ़ती है, तो विश्वास घटता है और इसका सीधा असर रुपये पर पड़ता है.”

तकनीकी स्तर क्या संकेत देते हैं?

Mecklai Financial Services की CEO दिप्ती चितले के मुताबिक:

  • तत्काल समर्थन (Immediate Support): 89.20
  • अगला गहरा समर्थन: 88.60
  • ऊपरी प्रतिरोध: 90.30–90.40

चितले का कहना है कि 90.30 के ऊपर ठहराव मिलने पर अगले लक्ष्य 90.50 और 91.00 के आसपास दिख सकते हैं.

CR Forex के पबारी का मानना है कि गुरुवार की तेज गिरावट इस बात का संकेत है कि दबाव अभी खत्म नहीं हुआ है, और जोड़ी 90.70–91.00 के दायरे की ओर बढ़ सकती है.

सरकार की प्रतिक्रिया

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंथा नागेश्वरन ने कहा कि उन्हें रुपये की मौजूदा गिरावट को लेकर चिंता नहीं है. उनके अनुसार, यह कमजोरी न तो वर्तमान में मुद्रास्फीति को बढ़ा रही है और न ही निर्यात को प्रभावित कर रही है. उन्होंने भरोसा जताया कि अगला साल रुपये के लिए बेहतर साबित होगा.

इस बीच, शुक्रवार को RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के संबोधन पर बाजार की नजरें टिकी होंगी, जहाँ रुपये की स्थिति पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की उम्मीद है.

रुपये की निरंतर गिरावट घरेलू और वैश्विक दोनों कारकों से प्रभावित है. आने वाले दिनों में RBI की टिप्पणी, FPI प्रवाह और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संकेतक यह तय करेंगे कि रुपये की दिशा आगे किस ओर जाती है.

Source: News Agencies

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