राष्ट्रपति ने उड़ाया राफेल, उस पायलट संग साझा किया पल जिसे पाकिस्तान ने कैद करने का किया था दावा

By: The Trek News Desk

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को हरियाणा के अंबाला वायुसेना स्टेशन से राफेल लड़ाकू विमान में उड़ान भरकर इतिहास रच दिया. यह पहली बार है जब किसी भारतीय राष्ट्रपति ने फ्रांस निर्मित इस अत्याधुनिक बहु-भूमिका लड़ाकू विमान में sortie (प्रशिक्षण उड़ान) की है.

भारतीय वायुसेना की ताकत के प्रतीक माने जाने वाले राफेल ने राष्ट्रपति मुर्मू की यह उड़ान भारतीय रक्षा क्षमताओं के आत्मविश्वास को एक नया आयाम दिया. इस दौरान वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह भी एक अन्य राफेल विमान में साथ उड़ान भर रहे थे, जिससे यह मिशन दो विमानों की संयुक्त उड़ान बन गया.

राष्ट्रपति के साथ रहीं राफेल की पहली महिला पायलट

राष्ट्रपति मुर्मू को राफेल के कॉकपिट में बैठाने में सहायता की फ्लाइट लेफ्टिनेंट शिवांगी सिंह ने, जो राफेल उड़ाने वाली भारतीय वायुसेना की पहली महिला पायलट हैं.
शिवांगी पहले भी सुर्खियों में रही थीं, जब पाकिस्तान ने “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान झूठा दावा किया था कि उनका विमान गिरा दिया गया और उन्हें बंदी बना लिया गया. भारतीय वायुसेना ने उस दावे को तुरंत खारिज करते हुए शिवांगी की हालिया तस्वीरें जारी की थीं.

वाराणसी (उत्तर प्रदेश) की रहने वाली शिवांगी सिंह 2017 में भारतीय वायुसेना में कमीशंड हुईं थीं. उन्होंने पहले राजस्थान के एक एयरबेस पर मिग-21 विमान उड़ाया, और 2020 में राफेल स्क्वाड्रन में शामिल हुईं.

प्रशिक्षण उड़ान का अनुभव और उड़ान का मार्ग

राष्ट्रपति सुबह करीब 9:30 बजे नई दिल्ली से अंबाला पहुंचीं, जहां वायुसेना प्रमुख ए. पी. सिंह ने उनका स्वागत किया और गार्ड ऑफ ऑनर प्रस्तुत किया गया. इसके बाद उन्होंने G-suit और हेलमेट पहनकर राफेल के कॉकपिट में प्रवेश किया.

राफेल विमान के पायलट ग्रुप कैप्टन अमित गहाणी थे, जो भारतीय वायुसेना की 17वीं स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरो’ के कमांडिंग ऑफिसर हैं.
करीब 30 मिनट चली इस उड़ान के दौरान विमान ने अंबाला से लगभग 100 मील के क्षेत्र में कई ऊँचाई और गति परीक्षणों के साथ तकनीकी क्षमताओं का प्रदर्शन किया.

राष्ट्रपति ने sortie के बाद शिवांगी सिंह के साथ राफेल के सामने तस्वीरें खिंचवाईं.

राष्ट्रपति की टिप्पणी: “राफेल उड़ान अविस्मरणीय अनुभव”

उड़ान के बाद राष्ट्रपति मुर्मू ने आगंतुक पुस्तिका में लिखा, “अंबाला वायुसेना स्टेशन की मेरी यात्रा और राफेल विमान में उड़ान मेरे लिए एक अविस्मरणीय अनुभव रही. इस शक्तिशाली विमान में उड़ान भरने से मुझे देश की रक्षा क्षमता पर और अधिक गर्व महसूस हुआ. मैं भारतीय वायुसेना और अंबाला स्टेशन की पूरी टीम को इस सफल sortie के लिए बधाई देती हूं.”

महिला नेतृत्व और राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक

राष्ट्रपति मुर्मू की यह उड़ान न केवल भारतीय वायुसेना के लिए गर्व का क्षण थी, बल्कि देशभर में महिलाओं की नेतृत्व क्षमता और रक्षा क्षेत्र में उनकी बढ़ती भूमिका का प्रतीक भी बनी. सोशल मीडिया पर इसे “प्रेरणादायक क्षण” बताते हुए लोगों ने राष्ट्रपति की सराहना की.

यह राष्ट्रपति मुर्मू का दूसरा बड़ा विमानन उपलब्धि भी है. इससे पहले, 2023 में उन्होंने सुखोई-30 एमकेआई में उड़ान भरकर भारतीय इतिहास में पहली बार किसी राष्ट्रपति द्वारा दो लड़ाकू विमानों में sortie करने की उपलब्धि हासिल की थी.

रणनीतिक महत्व और संदेश

अंबाला वायुसेना स्टेशन भारत के दो राफेल स्क्वाड्रनों में से एक, 17वीं स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरो’ का मुख्यालय है, जो पाकिस्तान के खिलाफ “ऑपरेशन सिंदूर” में अग्रणी भूमिका निभा चुका है. राष्ट्रपति की यह उड़ान वायुसेना की तत्परता और राफेल की सामरिक क्षमता को प्रदर्शित करती है.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की राफेल उड़ान केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि यह भारत के सैन्य आत्मविश्वास, महिलाओं की प्रगति और नागरिक नेतृत्व व सशस्त्र बलों के बीच मजबूत तालमेल का प्रतीक बन गई.

Source: News Agencies

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