By: The Trek News Desk
यूक्रेन को आर्थिक सहायता देने के लिए यूरोपीय संघ (EU) ने अंततः €90 अरब (लगभग 8.1 लाख करोड़ रुपये) का संयुक्त ऋण जारी करने का फैसला किया है. यह निर्णय उस समय लिया गया जब रूस से क्षतिपूर्ति (Reparations) के आधार पर ऋण देने की योजना सदस्य देशों के बीच गहरे मतभेदों के कारण विफल हो गई. इस नई व्यवस्था में हंगरी, चेक गणराज्य और स्लोवाकिया शामिल नहीं होंगे.
क्षतिपूर्ति ऋण योजना क्यों फेल हुई?
EU की मूल योजना रूस के केंद्रीय बैंक की जमी हुई संपत्तियों को आधार बनाकर यूक्रेन को ऋण देने की थी, ताकि “रूस से नुकसान की भरपाई” के सिद्धांत को लागू किया जा सके.
हालांकि, बेल्जियम सरकार ने इस योजना पर कड़ा रुख अपनाया. बेल्जियम का कहना था कि उसके यहां स्थित वित्तीय संस्था यूरोक्लियर (Euroclear), जहां बड़ी मात्रा में रूसी संपत्तियां रखी गई हैं, को किसी भी संभावित रूसी जवाबी कार्रवाई से बचाने के लिए “असीमित गारंटी” (Uncapped Guarantees) जरूरी है.
अन्य EU देशों ने इस मांग को अस्वीकार्य बताया. कई राजनयिकों के अनुसार, “असीमित गारंटी” का मतलब यह स्पष्ट नहीं था कि अंततः किस पर कितना वित्तीय जोखिम आएगा. इसी कारण यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका.
अब क्या है नई योजना?
लंबी और कठिन बातचीत के बाद EU नेताओं ने तय किया कि वे अगले दो वर्षों (2026 और 2027) के लिए यूक्रेन की ज़रूरतों को पूरा करने हेतु अंतरराष्ट्रीय बाजार से €90 अरब का संयुक्त ऋण लेंगे. यह ऋण यूरोपीय संघ के साझा बजट के खिलाफ उठाया जाएगा.
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लेयेन और डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने कहा कि सबसे अहम लक्ष्य, यूक्रेन को वित्तीय समर्थन पूरा हो गया है.
फ्रेडरिक्सन ने कहा, “आज के बाद यह साफ है कि यूक्रेन के लिए हमारा समर्थन सुरक्षित है.”
तीन देश बाहर क्यों?
हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बान पहले से ही यूक्रेन को वित्तीय सहायता देने के खिलाफ रहे हैं. उनका मानना है कि यूक्रेन यह युद्ध सैन्य रूप से नहीं जीत सकता और अंततः समझौता करना पड़ेगा.
ऑर्बान ने स्लोवाकिया और चेक गणराज्य के नेताओं के साथ मिलकर एक वैकल्पिक रास्ता सुझाया, जिसके तहत इन तीनों देशों को ऋण योजना से बाहर रखा गया.
EU के अंतिम निष्कर्षों में स्पष्ट किया गया कि:
- हंगरी, चेक गणराज्य और स्लोवाकिया पर इस ऋण से जुड़ी कोई वित्तीय जिम्मेदारी नहीं होगी.
- अन्य सदस्य देश “एन्हांस्ड कोऑपरेशन” तंत्र के तहत आगे बढ़ेंगे.
ऑर्बान ने साफ शब्दों में कहा, “यह दिखने में ऋण है, लेकिन यूक्रेन इसे कभी चुका नहीं पाएगा. अंत में यह पैसा अनुदान (Grant) बन जाएगा और इसकी जिम्मेदारी उन देशों की होगी जो इसके पीछे खड़े हैं.”
जर्मनी और फ्रांस का रुख
जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा ने इस संयुक्त ऋण को “सबसे तेज़ और प्रभावी तरीका” बताया.
मर्ज़ ने कहा कि रूस की संपत्तियों का उपयोग भविष्य में ऋण की गारंटी (Securitisation) के रूप में किया जाएगा, भले ही अभी समय-सीमा बदल दी गई हो.
रूस से क्षतिपूर्ति अब भी अनिश्चित
हालांकि EU ने यह उम्मीद जताई है कि भविष्य में रूस से मिलने वाली क्षतिपूर्ति से यूक्रेन इस ऋण को चुकाएगा, लेकिन यह बिल्कुल भी तय नहीं है कि रूस कभी ऐसा करेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यह ऋण अंततः अनुदान में बदल सकता है.
Source: News Agencies

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