यूके में ‘Palestine Action’ पर लगे प्रतिबंध को चुनौती देंगी सह-संस्थापक हुदा अम्मोरी

By: The Trek News Desk

‘पैलेस्टाइन एक्शन’ (Palestine Action) समूह पर लगाए गए विवादित ‘आतंकवादी संगठन’ टैग के खिलाफ उसकी सह-संस्थापक हुदा अम्मोरी इस सप्ताह लंदन हाई कोर्ट में कानूनी लड़ाई शुरू करने जा रही हैं. यह मामला ऐसे समय उठ रहा है जब पिछले महीने कोर्ट ऑफ अपील ने माना कि इस प्रतिबंध से अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकारों पर सवाल खड़े होते हैं.

न्यायिक समीक्षा की पहली सुनवाई बुधवार से शुरू होगी, जबकि अगली तारीखें गुरुवार और 2 दिसंबर तय की गई हैं.

प्रतिबंध सफलतापूर्वक हट सकता हैहजारों गिरफ्तारियाँ दांव पर

यदि अम्मोरी अदालत में सफल रहती हैं, तो जुलाई 2024 से लागू यह प्रतिबंध हट सकता है, एक ऐसा प्रतिबंध जिसके कारण अब तक 2,000 से अधिक लोगों को केवल “I oppose genocide, I support Palestine Action” जैसे बैनर या पोस्टर लेकर खड़े होने पर गिरफ्तार किया गया है.

वर्तमान नियमों के तहत इस संगठन की सदस्यता लेना या उसका समर्थन दिखाना 14 साल तक की जेल का अपराध है.

कीर स्टार्मर सरकार ने यह प्रतिबंध तब लगाया था जब जून में समूह के दो सदस्यों ने ऑक्सफ़ोर्डशायर स्थित RAF Brize Norton सैन्य बेस में घुसकर विमानों पर लाल रंग का पेंट छिड़क दिया था.
अगस्त में, संगठन के सदस्यों ने ब्रिस्टल में इसराइल की रक्षा कंपनी Elbit Systems की साइट में घुसकर ड्रोन नष्ट करने का दावा भी किया था. इस मामले में 24 कार्यकर्ता अभी भी हिरासत में हैं.

यह प्रतिबंध दमनकारी और राजनीति से प्रेरित”: अम्मोरी

मीडिया से बातचीत में हुदा अम्मोरी ने इस प्रतिबंध को “बेतुका और अधिनायकवादी” बताया.

उनका कहना है, “सरकार ने जनता की सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि असहमति को कुचलने और इसराइली हथियार उद्योग को बचाने के लिए ये कदम उठाया. अदालत को इसे ठीक करने का मौका है.”

उन्होंने कहा कि अगर अदालत फैसला उनके खिलाफ देती है, तब भी यह लड़ाई जारी रहेगी.

राजनीतिक विवाद गहरा रहा है

यूके में गिरफ्तारियों के खिलाफ अभियान चलाने वाले समूह Defend Our Juries ने भी इस प्रतिबंध को “पूरी तरह राजनीतिक” कहा.
समूह के सह-संस्थापक लेक्स कोर्टे ने कहा, “जब सरकार जनता की आवाज नहीं सुनती, तभी विरोध समूह पैदा होते हैं. यह प्रतिबंध विरोध को अपराध साबित करने की कोशिश है.”

पिछले महीनों में अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों, मानवाधिकार संगठनों और हजारों प्रदर्शनकारियों ने यूके पर ग़ज़ा  युद्ध में “अप्रत्यक्ष सहयोग” का आरोप लगाया है, विशेष रूप से F-35 जेट पार्ट्स की सप्लाई और ग़ज़ा के ऊपर निगरानी उड़ानों के कारण.

ब्रिटेन में पहली बार किसी ‘डायरेक्ट एक्शन’ समूह को आतंकी घोषित किया गया

यह पहला मौका है जब किसी प्रत्यक्ष कार्रवाई (Direct Action) करने वाले संगठन को यूके में आतंकवादी सूची में डाला गया है और यह भी पहली बार है कि किसी प्रतिबंधित संगठन को जुडिशल रिव्यू मिला है.

कानून विशेषज्ञों का कहना है कि यूके का ‘टेररिज़्म’ की परिभाषा वाला कानून, विशेषकर Terrorism Act 2000 बहुत अस्पष्ट है और गैर-हिंसक ‘संपत्ति को नुकसान’ जैसी गतिविधियों को भी आतंकवाद की श्रेणी में रख देता है.

ग़ज़ा युद्ध में UK की भूमिका पर उठते सवाल

लंदन स्थित मानवाधिकार संगठन Cage International ने मंगलवार को जारी रिपोर्ट में कहा कि सरकार “सीधे कार्रवाई के हर रास्ते को आतंकवाद विरोधी कानूनों के ज़रिये बंद कर रही है”.

रिपोर्ट के अनुसार, 2020 से 2025 के बीच Palestine Action की गतिविधियों ने ब्रिटेन में एक्टिविज़्म की दिशा बदल दी है, कई ऐसे स्थलों को अस्थायी रूप से बंद कराया गया है जो इसराइल की सेना को हथियार या तकनीक उपलब्ध कराते हैं.

Cage के पब्लिक एडवोकेसी प्रमुख अनस मुस्तफा ने कहा, “ग़ज़ा में जारी नरसंहार को देखते हुए जनता बहुत जागरूक हो चुकी है. इस बार सरकार की कार्रवाई उलटी पड़ गई.”

हाई कोर्ट के फैसले से अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य भी प्रभावित होगा

Defend Our Juries के कोर्टे के अनुसार, अदालत को समझना होगा कि उसका फैसला न सिर्फ यूके, बल्कि फ़िलिस्तीन और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी गहरी महत्ता रखता है.

अक्टूबर 2023 से जारी युद्ध में अभी तक:

  • ग़ज़ा में 69,700 से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं
  • 170,000 से अधिक घायल हुए
  • इसराइल में 1,139 लोग हमास हमलों में मारे गए
  • युद्ध शुरू होने के दो साल बाद हुए हालिया सीज़फायर के बावजूद, इसराइल ने ग़ज़ा में 300 से अधिक लोगों को मार दिया और सैकड़ों बार संघर्षविराम का उल्लंघन किया.

Source: News Agencies

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