By: प्रेरणा भारती
मेरठ का बुढ़ाना गेट अब शैक्षणिक और सांस्कृतिक शोध का नया पते के रूप में उभर आया है. स्वर्गीय डॉ. आरसी त्यागी के पैतृक आवास पर गुरुवार को ‘वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक अनुसंधान केंद्र’ का औपचारिक उद्घाटन हो गया. यह देश का पहला ऐसा केंद्र है, जिसे चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय ने स्थापित किया है.
कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने फीता काटकर केंद्र का शुभारंभ किया. इस मौके पर विश्वविद्यालय के रिसर्च डायरेक्टर प्रो. वीरपाल सिंह, स्वर्गीय डॉ. त्यागी के पुत्र डॉ. दिनेश त्यागी और डॉ. राजेश त्यागी (अमेरिका) सहित परिवार के कई सदस्य और विश्वविद्यालय के अधिकारी मौजूद रहे.
यह केंद्र उन छात्रों-शोधार्थियों के लिए खास है, जो उच्च गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक अनुसंधान करना चाहते हैं. यहां नासा और डीआरडीओ जैसी संस्थाओं में किस तरह का शोध होता है, उसकी झलक मिलेगी. डॉ. आरसी त्यागी नासा और डीआरडीओ से जुड़े वरिष्ठ भौतिक विज्ञानी थे. उन्होंने एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल डिटेक्टर के निर्माण में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की थी. 1 अगस्त 2020 को 85 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ.
उनकी अंतिम इच्छा के अनुसार परिवार ने पैतृक आवास विश्वविद्यालय को दान में दिया. अब इसे पुस्तकालय, अध्ययन केंद्र और इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च हब के रूप में विकसित किया जा रहा है.
1995 में डॉ. आरसी त्यागी चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग से जुड़े थे. उन्होंने प्रो. टीपी शर्मा के साथ कई शोधार्थियों को पीएचडी कराई और प्रो. वीरपाल सिंह के साथ मिलकर कई अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में शोध पत्र प्रकाशित किए. उनके आने से विभाग में शोध को नई गति मिली.

कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा, “डॉ. आरसी त्यागी का जीवन समर्पण, शोध और राष्ट्र निर्माण की जीती-जागती मिसाल है. उनका पैतृक आवास अब शोध और ज्ञान का नया केंद्र बनेगा. यह केंद्र वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ-साथ सांस्कृतिक चेतना और बौद्धिक संवाद को भी नई दिशा देगा. यहां सेमिनार, व्याख्यानमाला, शोध परिचर्चा और पुस्तकालय की सुविधाएं होंगी, ताकि युवा पीढ़ी उनसे प्रेरणा लेकर विज्ञान और समाज में योगदान दे सके.”
रिसर्च डायरेक्टर प्रो. वीरपाल सिंह ने कहा, “डॉ. त्यागी का वैज्ञानिक योगदान हमारी अमूल्य धरोहर है. यह केंद्र शोधार्थियों और छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा. विश्वविद्यालय इसे इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च हब के रूप में विकसित करेगा, जहां विज्ञान और संस्कृति का समन्वय होगा. उनकी स्मृति में नियमित व्याख्यान श्रृंखला और शोध कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी.”
केंद्र में क्या होगा?
– आधुनिक पुस्तकालय और अध्ययन कक्ष
– सेमिनार, व्याख्यान और शोध परिचर्चाएं
– विज्ञान और संस्कृति पर इंटरडिसिप्लिनरी शोध
– डॉ. त्यागी की स्मृति में नियमित कार्यक्रम
परिसर पर पहले ही ‘वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक अनुसंधान केंद्र’ का बोर्ड लगाया जा चुका है. जल्द ही यहां सभी सुविधाएं शुरू हो जाएंगी.
मुरादाबाद मूल के डॉ. त्यागी मेरठ से स्नातक करने के बाद नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी में काम किया. ब्रिटेन से पीएचडी की, फिर आईआईटी दिल्ली में सॉलिड स्टेट फिजिक्स लैब संभाली. बाद में नासा में इंफ्रा रेड कंडक्टर्स पर काम किया, जहां उनके नमूनों का पेटेंट हुआ. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बुलावे पर डीआरडीओ में शामिल हुए.

उन्होंने भारतीय संगीत के सात स्वरों की गणितीय फ्रीक्वेंसी निकाली और स्वर मंडल की रचना की. दिसंबर 2013 में कैंब्रिज स्कॉलर्स पब्लिकेशन ने उनकी इस खोज की सराहना की.
इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. अनिल कुमार यादव, वित्त अधिकारी रमेश चंद्र, प्रो. हरे कृष्णा, प्रो. भूपेंद्र सिंह, डॉ. अलका तिवारी सहित कई गणमान्य लोग और परिवारजन उपस्थित रहे.
यह केंद्र मेरठ को उच्च स्तरीय शोध और सांस्कृतिक अध्ययन का नया केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.
