By: प्रेरणा भारती
सतत विकास और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए मेरठ कॉलेज में सोमवार, 3 नवंबर 2025 को 125 किलोवाट क्षमता वाले रूफटॉप सोलर ऊर्जा संयंत्र का भव्य उद्घाटन किया गया. यह संयंत्र उत्तर प्रदेश सरकार की नई सौर ऊर्जा नीति के तहत स्थापित किया गया है और इसे रेस्को मोड (RESCO Mode) में तैयार किया गया है. इस संयंत्र का उद्घाटन एवं लोकार्पण कॉलेज के अवैतनिक मंत्री श्री विवेक कुमार गर्ग द्वारा किया गया. इस अवसर पर कॉलेज के प्राचार्य, शिक्षकगण, छात्र-छात्राएँ एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे.
अपने संबोधन में श्री विवेक गर्ग ने कहा कि यह सौर ऊर्जा संयंत्र न केवल कॉलेज परिसर की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक प्रेरणादायक पहल साबित होगा. 125 किलोवाट का यह संयंत्र प्रति वर्ष लगभग 1.5 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन करने में सक्षम है, जिससे कॉलेज को पारंपरिक विद्युत आपूर्ति पर निर्भरता कम होगी. इससे न केवल बिजली बिलों में उल्लेखनीय कमी आएगी, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी भारी कमी होगी.
प्रोफेसर सीमा पवार ने कहा कि सौर ऊर्जा का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह स्वच्छ, अक्षय और प्रदूषण-मुक्त ऊर्जा स्रोत है. यह ऊर्जा सूर्य की किरणों से प्राप्त होती है, जिससे प्राकृतिक संसाधनों का दोहन नहीं होता. इससे ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आती है, जो वैश्विक तापमान वृद्धि को रोकने में सहायक है. सौर ऊर्जा संयंत्रों के उपयोग से कोयला, डीज़ल और पेट्रोल जैसे जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटती है, जिससे पर्यावरण की रक्षा होती है.

मेरठ कॉलेज के इस सौर ऊर्जा संयंत्र के समन्वयक डॉक्टर मनोज सिवाच ने कहा कि मेरठ कॉलेज में इस सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना छात्रों के लिए भी एक शिक्षण प्रयोगशाला की तरह कार्य करेगी. विद्यार्थी नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में तकनीकी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे और स्वच्छ ऊर्जा के महत्व को समझ सकेंगे.
इस प्रकार, मेरठ कॉलेज का यह सौर ऊर्जा संयंत्र ऊर्जा आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है. यह परियोजना न केवल कॉलेज के लिए बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक प्रेरणास्रोत बनेगी और आने वाली पीढ़ियों को हरित ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करेगी.
