By: The Trek News Desk
शुक्रवार को ब्रिटेन सरकार ने एक नई डिजिटल आईडी योजना की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य अवैध अप्रवासन को रोकना और काम करने के अधिकार को सत्यापित करना है.
यह योजना ब्रिटेन के नागरिकों और निवासियों को उनके स्मार्टफोन में डिजिटल आईडी रखने का मौका प्रदान करेगी. हालांकि, सरकार का कहना है कि इस आईडी को ले जाना या दिखाना अनिवार्य नहीं होगा, लेकिन यह कार्यस्थल पर काम करने के लिए ज़रूरी होगा.
ब्रिटेन में पहले कभी पहचान पत्र (आईडी कार्ड) को लेकर विरोध हुआ था और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इन्हें हटा दिया गया था.
लेकिन प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की लेबर सरकार को प्रवासी मुद्दे पर जनता से बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ रहा है, खासकर उन आरोपों के तहत जो यह कहते हैं कि अप्रवासन पर नियंत्रण नहीं है.
डिजिटल आईडी के प्रमुख तत्व
यह डिजिटल आईडी योजना व्यक्ति का नाम, जन्मतिथि, फोटो, राष्ट्रीयता और निवास स्थिति जैसी जानकारी रखेगी. सरकार का कहना है कि यह “वर्क राइट” यानी काम करने का अधिकार साबित करने के लिए अनिवार्य होगी.

इसके जरिए सरकार चाहती है कि अवैध रूप से देश में रह रहे लोग रोजगार हासिल न कर सकें, जिससे “आकर्षक कारणों” का एक प्रमुख पहलू खत्म हो सके.
सरकार के बयान में कहा गया है कि इस आईडी के जरिए नागरिकों को ड्राइविंग लाइसेंस, चाइल्डकेयर, कल्याणकारी योजनाओं और टैक्स रिकॉर्ड्स जैसी सेवाओं तक पहुंच सरल होगी.
सरकार का तर्क और विपक्ष की आलोचना
प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने कहा, “डिजिटल आईडी ब्रिटेन के लिए एक बड़ा अवसर है. यह अवैध कामकाजी गतिविधियों को मुश्किल बनाएगा और हमारी सीमाओं को मज़बूत करेगा.”
हालांकि, यह योजना विपक्षी दलों के बीच विवाद का कारण बन गई है.
केंद्र-समर्थक लिबरल डेमोक्रेट्स पार्टी ने कहा कि वे उस योजना का समर्थन नहीं करेंगे जिसमें लोगों को अपनी व्यक्तिगत जानकारी देने के लिए मजबूर किया जाए, सिर्फ ताकि वे रोज़मर्रा की ज़िंदगी जी सकें.
योजना की आलोचना करते हुए कुछ विशेषज्ञों ने इस पर चिंता जताई है कि इससे नागरिकों की निजता पर आक्रमण हो सकता है, और डिजिटल रूप में व्यक्तिगत जानकारी का दुरुपयोग भी संभव है.
यह कदम ब्रिटेन में एक ऐसे समय में उठाया गया है, जब सार्वजनिक दबाव और लोकप्रियता के कारण सरकार को अप्रवासन और सीमाओं पर और अधिक सख्ती अपनाने की आवश्यकता महसूस हो रही है.
ब्रिटेन की डिजिटल आईडी योजना भविष्य में न केवल अवैध प्रवासियों पर निगरानी रखने के लिए, बल्कि देश के नागरिकों के लिए सरकारी सेवाओं तक आसान पहुंच को सुनिश्चित करने के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है.
लेकिन इस योजना को लेकर लगातार विवाद और चिंताएं बनी हुई हैं, जिनसे यह साफ होता है कि इस प्रकार के कदमों को लागू करते वक्त नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सुरक्षा को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है.
Source: News Agencies
