By: The Trek News Desk
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत आगमन से ठीक पहले एक कूटनीतिक विवाद ने तूल पकड़ लिया. ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के शीर्ष राजनयिकों ने एक भारतीय अखबार में संयुक्त रूप से एक लेख प्रकाशित किया, जिसमें यूक्रेन युद्ध के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराते हुए राष्ट्रपति पुतिन पर “मानव जीवन के प्रति पूर्ण उदासीनता” का आरोप लगाया गया.
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस कदम पर कड़ी नाराज़गी जताते हुए इसे “अस्वीकार्य और अप्रत्याशित” बताया.
लेख पर MEA की कड़ी प्रतिक्रिया
यूके की हाई कमिश्नर लिंडी कैमरन, फ्रांस के राजदूत थियरी माथू और जर्मनी के राजदूत फिलिप एकरमैन द्वारा लिखे गए इस लेख को लेकर एक वरिष्ठ MEA अधिकारी ने कहा, “यह बेहद असामान्य है. किसी तीसरे देश के संबंधों पर सार्वजनिक टिप्पणी देना कूटनीतिक शिष्टाचार के खिलाफ है. हमने इस पर ध्यान दिया है.”
‘दुनिया यूक्रेन युद्ध का अंत चाहती है, पर रूस शांति को लेकर गंभीर नहीं’ शीर्षक वाले इस लेख में रूस पर “निर्दय युद्ध रणनीति” अपनाने और “कठोर आक्रामकता” दिखाने का आरोप लगाया गया.
तीनों दूतों ने यह भी दावा किया कि रूस साइबर हमलों और दुष्प्रचार के माध्यम से “वैश्विक अस्थिरता” फैलाने में सक्रिय है, और नेतृत्व की “भौगोलिक विस्तार की महत्वाकांक्षा” यूक्रेन से कहीं आगे तक जाती है.
भारत-रूस के बीच श्रमिक गतिशीलता समझौता तय
विवाद के बीच, MEA अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया कि भारत और रूस जल्द ही एक मोबिलिटी एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कर सकते हैं, जिसके तहत बड़ी संख्या में भारतीय कुशल और अर्ध-कुशल कामगारों को रूस में रोजगार के अवसर मिलेंगे.
यूक्रेन युद्ध के बाद रूस में श्रमिकों की भारी कमी उभर आई है, क्योंकि पड़ोसी देशों के नागरिक रूसी कामकाज से दूरी बना रहे हैं.
MEA अधिकारियों के अनुसार, भारत रूस द्वारा मांगी जाने वाली श्रमिक संख्या पर कोई सीमा नहीं लगा रहा है, और निजी कंपनियों को आवश्यकता के अनुसार भर्ती करने की अनुमति होगी.
3 दिसंबर को चर्चा होगी
इस समझौते पर आगे की बातचीत 3 दिसंबर 2025 को ‘इंडिया वर्ल्ड’ पत्रिका और MEA द्वारा आयोजित वार्षिक कॉन्क्लेव में होगी.
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे, जबकि जर्मन राजदूत फिलिप एकरमैन और ऑस्ट्रेलिया के हाई कमिश्नर फिलिप ग्रीन भी इसमें शामिल होंगे.
Source: News Agencies
