बॉन्डी बीच हमले के पीड़ितों के लिए ऑस्ट्रेलिया में पहला अंतिम संस्कार, रब्बी को दी गई विदाई

By: The Trek News Desk

ऑस्ट्रेलिया में बॉन्डी बीच पर हुए सामूहिक गोलीकांड के पीड़ितों के लिए बुधवार को पहला अंतिम संस्कार आयोजित किया गया. इस दौरान बड़ी संख्या में लोग सिडनी के बॉन्डी इलाके में एकत्र हुए और हमले में मारे गए रब्बी एली श्लांगर को नम आंखों से अंतिम विदाई दी.

रविवार शाम बॉन्डी बीच पर आयोजित एक यहूदी उत्सव के दौरान साजिद अकरम और उसके बेटे नावीद अकरम ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी थी. इस हमले में 15 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि दर्जनों घायल हुए थे. मृतकों में एक 10 वर्षीय बच्ची, होलोकॉस्ट से बचे दो बुज़ुर्ग और एक दंपती भी शामिल थे, जिन्होंने हमलावरों को रोकने की कोशिश की थी.

पांच बच्चों के पिता एली श्लांगर, जिन्हें लोग “बॉन्डी रब्बी” के नाम से जानते थे, सबसे पहले श्रद्धांजलि पाने वालों में थे. उनका अंतिम संस्कार चाबाद ऑफ बॉन्डी सिनेगॉग में किया गया. चाबाद आंदोलन के अनुसार, श्लांगर जेलों और अस्पतालों में आध्यात्मिक सेवा देने वाले चैपलिन भी थे.

जैसे ही काले ताबूत में उनका पार्थिव शरीर सिनेगॉग लाया गया, माहौल ग़मग़ीन हो गया. कई लोगों की आंखों से आंसू बह निकले, जबकि परिवार और समुदाय के सदस्य शोक में डूबे नजर आए. यहूदी समुदाय के नेता एलेक्स रिवचिन ने कहा, “जो भी उन्हें जानता था, वह जानता था कि वह हम सबमें सबसे बेहतर इंसान थे.”

चाबाद ऑफ बॉन्डी सिनेगॉग में इसी दिन बाद में 39 वर्षीय रब्बी याकोव लेविटन का भी अंतिम संस्कार किया जाना है. वे चार बच्चों के पिता थे और अपने परोपकारी कार्यों के लिए जाने जाते थे.

सुरक्षा को देखते हुए सिनेगॉग के बाहर पुलिस की भारी तैनाती की गई थी. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात रहा.

प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ ने कहा, “आज का दिन समुदाय के लिए बेहद कठिन है. पहले अंतिम संस्कार की शुरुआत के साथ ही पूरे देश का दिल उनके साथ है.”

आतंक फैलाने की साजिश

ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने बताया कि यह हमला देश के यहूदी समुदाय में डर फैलाने की मंशा से किया गया था. प्रधानमंत्री अल्बानीज़ ने कहा कि पिता-पुत्र हमलावर नफरत की विचारधारा से प्रभावित थे और प्रारंभिक जांच में इस्लामिक स्टेट से जुड़ी सोच के संकेत मिले हैं.

इस बीच यह सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या सुरक्षा एजेंसियां समय रहते इस हमले को रोक सकती थीं. रिपोर्ट्स के अनुसार, नावीद अकरम वर्ष 2019 में खुफिया एजेंसियों के रडार पर आया था, लेकिन उसे तत्काल खतरा नहीं माना गया.

पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या दोनों ने हमले से कुछ हफ्ते पहले फिलीपींस यात्रा के दौरान किसी कट्टरपंथी समूह से संपर्क किया था. इमिग्रेशन रिकॉर्ड के मुताबिक, वे नवंबर का अधिकांश समय फिलीपींस में रहे थे और उनकी अंतिम यात्रा मंज़िल दावाओ बताई गई है, जो कट्टरपंथी गतिविधियों के लिए जाना जाता है.

हमले के दौरान दोनों हमलावरों ने करीब 10 मिनट तक बॉन्डी बीच इलाके में गोलियां चलाईं. पुलिस ने मौके पर 50 वर्षीय साजिद अकरम को मार गिराया, जबकि 24 वर्षीय नावीद अकरम गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल में भर्ती है और पुलिस निगरानी में है. स्थानीय मीडिया के अनुसार, वह हाल ही में कोमा से बाहर आया है.

बहादुरी की मिसाल बने दंपती

घटना से जुड़ा एक डैशकैम वीडियो सामने आया है, जिसमें सेवानिवृत्त मैकेनिक बोरिस गुरमैन और उनकी पत्नी सोफिया गुरमैन हमलावरों को रोकने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं. बोरिस ने एक हमलावर को जमीन पर गिराकर उसका हथियार छीनने की कोशिश की, लेकिन हमलावर के पास दूसरा हथियार होने के कारण दोनों को गोली मार दी गई.

परिवार ने बयान में कहा, “हम अपने प्रियजनों को खोने के दर्द से टूटे हुए हैं, लेकिन उनकी बहादुरी और निस्वार्थता पर हमें गर्व भी है.”

इस हमले के बाद ऑस्ट्रेलियाई नेतृत्व ने उन कानूनों को सख्त करने पर सहमति जताई है, जिनके तहत साजिद अकरम के पास कई हथियार थे. 1996 के पोर्ट आर्थर नरसंहार के बाद से ऑस्ट्रेलिया में सामूहिक गोलीबारी की घटनाएं दुर्लभ रही हैं, लेकिन हाल के वर्षों में निजी हथियारों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

हमले ने देश में यहूदी विरोधी घटनाओं को लेकर भी बहस तेज़ कर दी है. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पश्चिमी देशों से यहूदी समुदाय की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है.

Source: News Agencies

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