By: The Trek News Desk
चुनाव आयोग ने सोमवार को बिहार विधानसभा चुनाव के लिए मतदान दो चरणों में कराने की घोषणा की. मतदान 6 और 11 नवम्बर को होगा, और चुनाव परिणाम 14 नवम्बर को घोषित किए जाएंगे. यह बिहार में पिछले दो दशकों में सबसे कम समय में होने वाला विधानसभा चुनाव होगा.
पिछले तीन विधानसभा चुनावों में बिहार में मतदान के चरणों की संख्या लगातार घटती रही है. 2010 में छह चरणों में चुनाव हुए थे, जो 2015 में पांच और 2020 में तीन चरणों तक घट गए. 2005 में चार चरणों में मतदान हुआ था. इस बार चुनाव आयोग ने बिहार में केवल दो चरणों में मतदान का निर्णय लिया है.
यह फैसला पिछले साल जम्मू और कश्मीर के विधानसभा चुनावों में भी तीन चरणों का चुनाव कराने के बाद लिया गया था, जो कि 28 सालों में सबसे कम समय में हुए चुनाव थे.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में NDA का मुकाबला RJD और कांग्रेस के गठबंधन से
इस बार के चुनाव में बिहार की वर्तमान NDA सरकार, जिसका नेतृत्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कर रहे हैं, उसका मुकाबला RJD और कांग्रेस के विपक्षी गठबंधन से होगा. पिछली बार RJD सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी, जिसके पास 75 सीटें थीं, जबकि BJP और JD(U) ने मिलकर 117 सीटों पर जीत हासिल की थी. इस बार नई पार्टी जन सुराज (Prashant Kishor का संगठन) भी मैदान में है.

चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों की राय ली थी
बिहार विधानसभा का कार्यकाल 22 नवम्बर को समाप्त हो रहा है, और चुनाव आयोग ने 4 और 5 अक्टूबर को बिहार में चुनाव की तैयारियों का निरीक्षण किया था. राजनीतिक दलों ने आयोग से चुनाव 25 अक्टूबर के बाद कराने का अनुरोध किया था, क्योंकि छठ पूजा 25 से 28 अक्टूबर तक है. इसके अलावा, कई दलों ने मतदान चरणों की संख्या कम करने की भी सिफारिश की थी.
मतदान चरणों को कम करने का कारण: 2024 के लोकसभा चुनावों का अनुभव
चुनाव आयोग के निर्णय के पीछे एक प्रमुख कारण 2024 के लोकसभा चुनावों का अनुभव है, जो अत्यधिक गर्मी के कारण लंबे समय तक चले थे. गर्मी के कारण वोटिंग प्रतिशत में कमी आई थी, खासकर उन क्षेत्रों में जहां तापमान 50°C तक पहुंच गया था. लोकसभा चुनाव 2024 सात चरणों में हुए थे, जो देश के इतिहास में सबसे लंबे चुनावों में से एक थे.
उस अनुभव को ध्यान में रखते हुए, चुनाव आयोग ने राज्य विधानसभा चुनावों में मतदान के चरणों की संख्या कम करने का निर्णय लिया है.
बिहार चुनाव के लिए विशेष मतदाता पुनरीक्षण
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने 24 जून को देशभर में विशेष मतदाता पुनरीक्षण (SIR) का ऐलान किया था. इसके तहत बिहार के मतदाता सूची में 68.5 लाख वोटरों को हटाया गया, जबकि 21.53 लाख नए वोटर जोड़े गए. इसके बाद बिहार के कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 7.42 करोड़ हो गई है. हालांकि, इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है, और मंगलवार को इस पर अगली सुनवाई होगी.

2020 के चुनावों से तुलना
पिछले बिहार विधानसभा चुनाव, जो 2020 में हुए थे, COVID-19 महामारी के दौरान पहले चुनाव थे. उस समय चुनाव तीन चरणों में आयोजित हुए थे, और मतदान 28 अक्टूबर से 7 नवम्बर तक हुआ था. 2020 में मतदान का प्रतिशत 56.93% रहा था, जिसमें महिलाओं का मतदान 59.69% और पुरुषों का मतदान 54.45% था.
यह चुनाव, विशेष रूप से दो चरणों में मतदान का निर्णय और निर्वाचन प्रक्रिया की संक्षिप्तता, बिहार में एक नया बदलाव लेकर आएगा, जो अगले कुछ वर्षों में राज्य के चुनावों के लिए एक मॉडल बन सकता है.
Source: News Agencies
