By: The Trek News Desk
बिहार में चुनावी सरगर्मियों के बीच जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने मंगलवार को केंद्र सरकार के दो वरिष्ठ मंत्रियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. किशोर का दावा है कि गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जन सुराज पार्टी के कई उम्मीदवारों को धमकाया और दबाव बनाकर उनका नामांकन वापस करवाया.
पटना स्थित शेखपुरा हाउस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में किशोर ने कहा,
“बीजेपी को इस बार हार का डर सता रहा है. पहले वो कहते थे कि कोई भी जीते, सरकार तो उनकी ही बनेगी, लेकिन अब जन सुराज ने उनकी नींव हिला दी है.”
“उम्मीदवार को बंधक बनाकर रोका गया नामांकन से”
किशोर ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि दानापुर से जन सुराज के उम्मीदवार अखिलेश कुमार उर्फ मुतुर शाह को नामांकन से रोका गया. उनका आरोप है कि शाह को कथित रूप से पूरे दिन बीजेपी नेताओं के साथ बैठाया गया, जिनमें अमित शाह और बिहार चुनाव प्रभारी शामिल थे.
“लोगों से कहा गया कि उन्हें आरजेडी के गुंडों ने बंधक बनाया है, लेकिन सच्चाई ये थी कि वो देश के गृह मंत्री के साथ बैठा था,” किशोर ने कहा.
“यह बीजेपी का असली चेहरा है.”
धर्मेंद्र प्रधान पर तीन उम्मीदवारों को दबाव में लाने का आरोप
किशोर ने धर्मेंद्र प्रधान पर भी सीधा हमला बोला और कहा कि उन्होंने जन सुराज के तीन उम्मीदवारों को नामांकन वापसी के लिए मजबूर किया. इस दौरान उन्होंने एक तस्वीर भी साझा की, जिसमें प्रधान ब्रह्मपुर के उम्मीदवार डॉ. सत्य प्रकाश तिवारी के साथ नजर आ रहे हैं.
“डॉ. तिवारी पटना के एक प्रतिष्ठित डॉक्टर हैं. तीन दिन तक ज़ोरदार प्रचार किया, फिर अचानक नाम वापस ले लिया. क्या किसी केंद्रीय मंत्री का विपक्षी उम्मीदवार के घर जाकर मिलना सामान्य बात है?” किशोर ने पूछा.
“शासन के दबाव में पीछे हटे अन्य उम्मीदवार”
प्रशांत किशोर ने बताया कि गोपालगंज में उम्मीदवार डॉ. शशि शेखर सिन्हा पर भी दबाव बनाया गया. उन्होंने बताया कि डॉ. सिन्हा, जो स्थानीय नेता रघुनाथ पांडेय के दामाद हैं, दो दिन पहले तक सक्रिय प्रचार कर रहे थे. “उन्होंने मुझे कॉल करके कहा था कि उन पर दबाव है लेकिन वे पार्टी के साथ खड़े रहेंगे. दो घंटे बाद उन्होंने नामांकन वापस ले लिया और फोन स्विच ऑफ कर लिया,” किशोर ने कहा.
उन्होंने आगे बताया कि कुम्हरार से प्रो. केसी सिन्हा और वाल्मीकिनगर से डॉ. नारायण प्रसाद पर भी धमकियों और तकनीकी अड़चनों के जरिए दबाव डाला गया.
“वाल्मीकिनगर के उम्मीदवार एक स्कूल शिक्षक रहे हैं जिन्होंने दो साल पहले इस्तीफा दिया था. अब अधिकारियों का कहना है कि उनका इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ, और वो चुनाव नहीं लड़ सकते.”
चुनाव आयोग पर भी उठाए सवाल
किशोर ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए और पूछा,
“अगर आप उम्मीदवारों की सुरक्षा नहीं दे सकते, तो मतदाताओं की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करेंगे? अगर उम्मीदवारों को धमकाकर हटाया जा सकता है, तो वोटिंग वाले दिन मतदाताओं को डराने से कौन रोकेगा?”
उन्होंने दावा किया कि अब तक 14 जन सुराज उम्मीदवारों को धमकाया गया है, हालांकि 240 उम्मीदवार डटे हुए हैं.
“बीजेपी को गुंडों से नहीं, शरीफ लोगों से डर है”
किशोर ने कहा कि बीजेपी को महागठबंधन से नहीं, बल्कि जन सुराज से डर है क्योंकि उनके उम्मीदवार डॉक्टर, प्रोफेशनल और व्यापारी जैसे सम्मानित वर्गों से हैं.
“बीजेपी को बाहुबलियों से नहीं डर लगता, बल्कि पढ़े-लिखे, इमानदार लोगों से डर है. यही जन सुराज की ताकत है,” उन्होंने कहा.
मुस्लिम और पिछड़े वर्गों को दी प्राथमिकता
उम्मीदवार चयन को लेकर पूछे गए सवाल पर किशोर ने बताया कि पार्टी ने 54 सीटें अति पिछड़ा वर्ग को दी हैं और 34 सीटें मुस्लिम उम्मीदवारों को.
“हमने 70 सीटें देने की योजना बनाई थी, लेकिन 54 पर कामयाबी मिली, यह अब तक किसी भी पार्टी द्वारा इस वर्ग को दी गई सबसे ज्यादा हिस्सेदारी है.”
चुनाव से पहले गरमाया बिहार का सियासी तापमान
प्रशांत किशोर के इन आरोपों ने बिहार की चुनावी राजनीति में हलचल मचा दी है. जहां बीजेपी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, वहीं जन सुराज ने साफ किया है कि वह दबाव में नहीं झुकेंगे और लड़ाई जारी रखेंगे.
Source: News Agencies
