By: प्रेरणा भारती
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के ललित कला संस्थान में लोक कलाओं का निशुल्क प्रशिक्षण बालिकाओं के लिए आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बनता जा रहा है. उत्तर प्रदेश की माननीय राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा तथा कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे इस विशेष कार्यक्रम के तहत अब तक लगभग ढाई हजार बालिकाओं को विभिन्न लोक कलाओं का प्रशिक्षण दिया जा चुका है.
शुक्रवार को राजकीय हाई स्कूल हिम्मतपुर सिंभावली (हापुड़) के छात्र-छात्राओं को लिप्पन कला और मधुबनी कला का प्रशिक्षण दिया गया. बालिकाओं ने उत्साह के साथ कागज, कार्डबोर्ड, कपड़े और प्लाई पर प्राथमिक एवं द्वितीयक रंगों से मधुबनी चित्र बनाए तथा काले रंग की आउटलाइन से उन्हें सुंदरता प्रदान की. वहीं लिप्पन कला में मिट्टी (क्ले), विभिन्न आकार के छोटे-छोटे दर्पण और 3D तकनीक का उपयोग कर आकर्षक कलाकृतियाँ तैयार कीं.
चित्रों के विषयों में सूर्य-चंद्रमा, नृत्य करती नारी आकृतियाँ, ढोल, पशु-पक्षी, वृक्ष-वनस्पति आदि को बेहद जीवंत रूप दिया गया. कार्यक्रम में विद्यालय की शिक्षिकाएँ भी प्रशिक्षण में शामिल हुईं और उन्होंने भी लोक कलाएँ सीखीं.

ललित कला संस्थान की समन्वयक प्रोफेसर अलका तिवारी ने बताया, “यह प्रशिक्षण केवल कला सिखाने तक सीमित नहीं है. वर्ली, सांझी, लिप्पन, मेहंदी, मधुबनी जैसी लोक कलाओं में पारंगत होने के बाद बड़ी संख्या में बालिकाएँ इन कलाकृतियों को बेचकर स्वावलंबी बन रही हैं. कई बालिकाएँ घर बैठे ऑर्डर ले रही हैं और अपना छोटा-मोटा व्यवसाय चला रही हैं.”
कार्यक्रम के सफल आयोजन में शिल्पी शर्मा, सुश्री दीपांजलि, आशीष कुमार आदि का विशेष योगदान रहा.
प्रो. तिवारी ने कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य है कि ग्रामीण एवं छोटे शहरों की अधिक से अधिक बालिकाओं तक यह निशुल्क प्रशिक्षण पहुँचे ताकि कला के साथ-साथ उनका आर्थिक सशक्तिकरण भी हो सके.
