By: The Trek News Desk
पोप लियो XIV ने अपने पापसी कार्यकाल की पहली विदेश यात्रा की शुरुआत तुर्की पहुँचकर की, जहाँ वे ईसाई इतिहास की एक महत्वपूर्ण वर्षगांठ में शामिल होंगे. इसके बाद वे लेबनान की यात्रा करेंगे. यह निर्णय उस समय भी कायम रखा गया जब कुछ दिन पहले ही इसराइल ने बेरूत पर हवाई हमले किए थे.
“मानवता में भाईचारा संभव है” – पोप लियो
अंकारा के लिए उड़ान भरते समय पोप लियो ने अपनी यात्रा का सार बताते हुए कहा कि, “धर्म, विचार और पहचान के फर्क के बावजूद, हर इंसान एक-दूसरे का भाई-बहन बन सकता है.”
यह संदेश उस “ब्रिज-बिल्डिंग” (पुल बनाने) की थीम की पुष्टि करता है, जिसे उन्होंने मई में वैटिकन की बालकनी पर पहला संबोधन देते हुए ही अपना मूल सिद्धांत बना लिया था.
निकेया परिषद की 1,700वीं वर्षगांठ का प्रमुख आयोजन
तुर्की के ऐतिहासिक शहर इज़निक (प्राचीन नीकिया) में पोप लियो विभिन्न ईसाई परंपराओं के नेताओं के साथ एक स्मृति समारोह में हिस्सा लेंगे.
साल 325 ईस्वी में हुई इस परिषद में 200 से अधिक बिशपों ने यह मत स्वीकार किया था कि यीशु ईश्वर के पुत्र हैं, जिसके आधार पर आगे चलकर Nicene Creed अस्तित्व में आया.
हालाँकि पूर्वी और पश्चिमी ईसाई चर्च बाद में अलग हो गए, लेकिन इस यात्रा में एकता और मेल-मिलाप का संदेश प्रमुख रहेगा.
धर्मों के बीच संवाद पर भी जोर
तुर्की दौरे के दौरान पोप लियो प्रसिद्ध ब्लू मॉस्क (ब्लू मस्जिद) का भी दौरा करेंगे, यह परंपरा पिछले दो पोपों ने भी निभाई थी. वे विभिन्न धर्मों के नेताओं से भी मिलेंगे, ताकि अंतर-धार्मिक संवाद को आगे बढ़ाया जा सके.
इसके बाद पोप लेबनान के लिए रवाना होंगे.
बेरूत हमलों के बावजूद लेबनान यात्रा यथावत
वैटिकन ने स्पष्ट किया है कि इस सप्ताह बेरूत पर हुए इसराइली हमलों के बावजूद यात्रा रद्द नहीं की जाएगी.
लेबनान में पोप युवाओं से मिलेंगे और ईसाई समुदाय, जो देश की लगभग एक-तिहाई आबादी है, उसको विशेष संदेश देंगे.
बंदरगाह विस्फोट स्थल पर प्रार्थना सभा
यात्रा के अंतिम दिन पोप लियो 2020 के बेरूत पोर्ट विस्फोट स्थल पर मिस्सा (Mass) का नेतृत्व करेंगे, जहाँ 200 से अधिक लोग मारे गए थे और 7,000 से ज्यादा घायल हुए थे.
यह कार्यक्रम पीड़ित परिवारों के लिए एक प्रतीकात्मक श्रद्धांजलि होगा.
राजनीति से दूरी, लेकिन संतुलन बना रहे हैं
पोप लियो ने पिछले छह महीनों में माइग्रेंट अधिकारों जैसे मुद्दों पर अपने विचार रखे हैं, लेकिन वे अपने पूर्ववर्ती पोप फ्रांसिस की तुलना में अपेक्षाकृत राजनीतिक सतर्कता के साथ आगे बढ़े हैं.
उनकी यही संतुलित शैली, जहाँ परंपरावादी और प्रगतिवादी दोनों अपने-अपने पक्ष में उनकी बातें खोज लेते हैं, उन्हें वैटिकन में एक सहमति-आधारित नेता के रूप में प्रस्तुत करती है.

मध्यपूर्व संघर्ष पर क्या कहेंगे पोप?
तुर्की के राष्ट्रपति रेजेप तैयप एर्दोगान और लेबनान के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात के दौरान यह देखा जाएगा कि पोप क्षेत्रीय संघर्षों पर किस हद तक टिप्पणी करते हैं.
पारंपरिक रूप से, रोम लौटते समय पोप विमान में प्रेस से बातचीत करते हैं, इस यात्रा के बाद भी उनके विचार सुनने को मिल सकते हैं.
इस बार अंग्रेज़ी में संबोधन
वैटिकन ने पुष्टि की है कि तुर्की यात्रा के दौरान पोप लियो मुख्यतः अंग्रेज़ी में बोलेंगे, एक ऐसी आवाज़ जिसमें उनका प्राकृतिक शिकागो लहजा झलकता है. लेबनान में वे कुछ फ्रेंच में भी संबोधन देंगे.
Source: News Agencies
