ट्रम्प ने रूस की तेल कंपनियों पर लगाए कड़े प्रतिबंध, यूरोपीय संघ ने रूसी एलएनजी पर लगाया बैन

By: The Trek News Desk

यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की दिशा में रूस की निष्क्रियता से नाराज़ होकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस की सबसे बड़ी दो तेल कंपनियों, लुकोइल (Lukoil) और रोसनेफ्ट (Rosneft)  पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए हैं. यह ट्रम्प द्वारा व्हाइट हाउस में वापसी के बाद रूस पर लगाया गया पहला बड़ा कदम है.

इसी दिन यूरोपीय संघ (EU) ने भी अपना 19वां प्रतिबंध पैकेज मंज़ूर किया, जिसमें रूसी तरल प्राकृतिक गैस (LNG) पर पूर्ण प्रतिबंध शामिल है.

अमेरिका ने रूस की ऊर्जा ताकत पर कसा शिकंजा

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बुधवार को जारी बयान में कहा,

“आज के प्रतिबंध रूस की ऊर्जा प्रणाली पर दबाव बढ़ाएंगे और क्रेमलिन की युद्ध वित्तीय क्षमताओं को कमजोर करेंगे.”

वित्त विभाग द्वारा लगाए गए इन प्रतिबंधों के तहत अमेरिका में लुकोइल और रोसनेफ्ट की संपत्तियाँ फ्रीज़ कर दी गई हैं. साथ ही, अमेरिकी नागरिकों और कंपनियों को इन फर्मों के साथ किसी भी प्रकार के व्यापार से रोक दिया गया है.

हालाँकि, अमेरिकी प्रतिबंधों में चीन और भारत जैसे देशों के रूसी तेल खरीदारों को शामिल नहीं किया गया है.

राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि वे अगले सप्ताह दक्षिण कोरिया में होने वाले APEC सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के दौरान इस मुद्दे को उठाएँगे. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर रूस युद्ध जारी रखता है, तो अमेरिका आगे और सख्त कदम उठाने को तैयार है.

वैश्विक बाज़ार में रूस के लिए कोई जगह नहीं’

रूसी तेल दिग्गज रोसनेफ्ट, जो गैज़प्रोम के बाद रूस की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है, पिछले कुछ वर्षों में पहले से ही गिरती तेल कीमतों और पुराने प्रतिबंधों से बुरी तरह प्रभावित हुई है. 2025 की पहली छमाही में कंपनी का मुनाफा 68% तक गिर गया.

वहीं लुकोइल, जो रूस की सबसे बड़ी निजी ऊर्जा कंपनी है, ने 2024 में 26.5% की गिरावट दर्ज की.

ब्रिटेन ने पिछले सप्ताह इन दोनों कंपनियों पर अपने स्वतंत्र प्रतिबंध लगाए थे. लंदन ने कहा था कि “रूस के लिए वैश्विक बाज़ार में कोई जगह नहीं है” और ब्रिटेन यूक्रेन युद्ध को वित्तीय रूप से रोकने के लिए हर कदम उठाएगा.

ट्रम्प की ‘धैर्य की सीमा’ पार

ट्रम्प ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उन्होंने हंगरी में राष्ट्रपति पुतिन से होने वाली बैठक को रद्द कर दिया है, क्योंकि “वक्त सही नहीं लग रहा था.”

उन्होंने कहा-

“हर बार जब मैं व्लादिमीर से बात करता हूँ, बातचीत अच्छी होती है, लेकिन कोई प्रगति नहीं होती. इसलिए इस बार मैंने बैठक रद्द कर दी.”

ट्रम्प ने उम्मीद जताई कि ये प्रतिबंध लंबे समय तक लागू नहीं रहेंगे, लेकिन स्पष्ट किया कि अब अमेरिका की सहनशीलता समाप्त होती जा रही है.

यूरोपीय संघ ने भी दिखाई सख़्ती

अमेरिका की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद, यूरोपीय संघ ने भी रूस पर अपना 19वां प्रतिबंध पैकेज मंज़ूर किया, जिसमें पहली बार रूसी एलएनजी (LNG) आयात पर पूर्ण प्रतिबंध शामिल है.

डेनमार्क की अध्यक्षता में जारी बयान में कहा गया कि सभी सदस्य देशों की सहमति के बाद यह निर्णय लिया गया. स्लोवाकिया, जो पहले विरोध कर रहा था, को ऊर्ज़ा कीमतों और औद्योगिक नीतियों को लेकर आश्वासन देने के बाद मनाया गया.

नए प्रावधानों के अनुसार, रूस के साथ लघु अवधि के एलएनजी अनुबंध छह महीनों में समाप्त होंगे, जबकि दीर्घकालिक अनुबंध 1 जनवरी 2027 से समाप्त हो जाएँगे.

इसके अलावा, ईयू ने रूसी राजनयिकों की यात्रा पर नए प्रतिबंध, रूस की ‘शैडो फ्लीट’ के 117 जहाजों को काली सूची में जोड़ा है (कुल संख्या अब 558 हो गई है), और कज़ाखस्तान व बेलारूस के बैंकों को भी निशाने पर लिया है.

यूक्रेन ने किया स्वागत

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ अंद्रिय यरमक ने इस निर्णय का स्वागत किया और टेलीग्राम पर लिखा-

“हम नहीं रुक रहे हैं. पैकेज नंबर 20 पहले से तैयार है. जितना कम पैसा रूस के पास होगा, उतनी कम मिसाइलें यूक्रेन पर गिरेंगी.”

अमेरिका और यूरोपीय संघ दोनों ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक रूस यूक्रेन युद्ध समाप्त नहीं करता, तब तक पश्चिमी देशों का आर्थिक दबाव और अधिक बढ़ता जाएगा. आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि क्या ये नए प्रतिबंध रूस को युद्धविराम के लिए मजबूर कर पाते हैं या नहीं.

Source: News Agencies

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