By: The Trek News Desk
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (BBC) के खिलाफ 1 अरब डॉलर (लगभग ₹8,300 करोड़) का मुकदमा दायर करने की चेतावनी दी है. आरोप है कि बीबीसी ने अपनी एक डॉक्यूमेंट्री में ट्रम्प के भाषण का संपादित और भ्रामक संस्करण दिखाया, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा और बीबीसी के दो शीर्ष अधिकारियों को इस्तीफा देना पड़ा.
ट्रम्प की लीगल टीम का नोटिस: ‘पूर्ण और निष्पक्ष माफी मांगे BBC’
ट्रम्प के वकील अलेजांद्रो ब्रिटो द्वारा भेजे गए एक कानूनी नोटिस में BBC से डॉक्यूमेंट्री को वापस लेने और उसमें किए गए “झूठे, भ्रामक और मानहानिकारक दावों” को सुधारने की मांग की गई है.
पत्र में कहा गया है कि बीबीसी को शुक्रवार तक “पूर्ण और निष्पक्ष खंडन (full and fair retraction)” जारी करना होगा और ट्रम्प को हुए नुकसान की उचित भरपाई करनी होगी, अन्यथा कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
पत्र में चेतावनी दी गई है, “The BBC is on notice. PLEASE GOVERN YOURSELF ACCORDINGLY.”
यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया.
BBC की सफाई: “पत्र की समीक्षा की जा रही है”
BBC के एक प्रवक्ता ने मीडिया से कहा कि संस्था ने ट्रम्प के वकील का पत्र प्राप्त कर लिया है और जल्द ही उसका जवाब “सही समय पर” दिया जाएगा.
हालांकि कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका में ट्रम्प के लिए मानहानि का मुकदमा जीतना कठिन होगा, क्योंकि वहां पहला संशोधन (First Amendment) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को व्यापक सुरक्षा प्रदान करता है.
अंतरराष्ट्रीय कानूनी कार्रवाई भी कठिन
कानून विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका की अदालतें विदेशी न्यायिक फैसलों को लागू नहीं कर सकतीं यदि वे First Amendment के विपरीत हों.
इसलिए ट्रम्प अगर ब्रिटेन में BBC के खिलाफ केस भी जीत जाते हैं, तो उसे अमेरिका में लागू नहीं कराया जा सकेगा.
SPEECH Act 2010 के तहत ऐसा प्रतिबंध स्पष्ट रूप से निर्धारित है.

विवादित डॉक्यूमेंट्री: Trump – A Second Chance?
बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री “Trump: A Second Chance?” विवादों में तब आई जब एक आंतरिक मेमो लीक हुआ, जिसमें निर्माताओं पर ट्रम्प के भाषण को इस तरह एडिट करने का आरोप लगाया गया कि वह 6 जनवरी 2021 को कैपिटल हिल दंगे को सीधे उकसाते हुए दिखाई दें.
डॉक्यूमेंट्री में ट्रम्प को यह कहते दिखाया गया था, “We fight like hell,” तुरंत बाद जब उन्होंने समर्थकों से कहा था, “We’re going to walk down to the Capitol.”
जबकि वास्तविक भाषण में ट्रम्प ने “Capitol चलने” की अपील के बाद कहा था कि वे “अपने बहादुर सांसदों और महिला सांसदों का हौसला बढ़ाने” जा रहे हैं, और “fight like hell” वाली टिप्पणी उन्होंने लगभग एक घंटे बाद की थी.
बीबीसी नेतृत्व में उथल-पुथल
मेमो के बाहर आने के बाद बीबीसी पर संपादकीय पक्षपात (editorial bias) और संवेदनशील मुद्दों को दबाने के आरोप लगे.
इसके चलते डायरेक्टर जनरल टिम डेवी और हेड ऑफ न्यूज़ डेबोरा टर्नेस ने रविवार को अपने पदों से इस्तीफा दे दिया.
बीबीसी के चेयरमैन समीर शाह ने सोमवार को स्वीकार किया कि प्रसारित क्लिप “भ्रामक” थी और इसे “निर्णय में त्रुटि (error of judgement)” बताया, लेकिन उन्होंने संस्थागत पक्षपात के आरोपों को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि लीक हुआ मेमो “वास्तविक परिस्थितियों और निर्णयों की पूरी तस्वीर” नहीं दर्शाता.
ट्रम्प की प्रतिक्रिया: “BBC के लोग बेईमान और भ्रष्ट”
ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल (Truth Social) पर बीबीसी अधिकारियों के इस्तीफों का स्वागत करते हुए उन्हें “बेईमान और भ्रष्ट” कहा.
उन्होंने दावा किया कि बीबीसी “फेक न्यूज़ मीडिया का सबसे बड़ा उदाहरण” बन चुका है.
मीडिया से टकराव का पुराना इतिहास
ट्रम्प का यह कदम उनकी लंबे समय से चली आ रही मीडिया-विरोधी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.
उन्होंने पहले भी The New York Times, The Wall Street Journal, और ABC News जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों पर मानहानि के मुकदमे दायर किए हैं.
इसके अलावा उन्होंने NPR, PBS की फंडिंग में कटौती और Associated Press पत्रकारों को व्हाइट हाउस प्रेस पूल से हटाने के आदेश भी दिए थे.
बीबीसी के खिलाफ ट्रम्प का कानूनी नोटिस न केवल एक और राजनीतिक विवाद को जन्म दे रहा है, बल्कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक जवाबदेही पर भी नया विमर्श खोल रहा है.
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बीबीसी इस नोटिस का जवाब कैसे देता है, और क्या यह मामला अमेरिकी अदालत तक पहुंचता है या नहीं.
Source: News Agencies
