By: The Trek News Desk
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विश्व आर्थिक मंच (WEF) के दौरान डावोस में एक नई अंतरराष्ट्रीय पहल ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की औपचारिक स्थापना से जुड़े दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर किए. ट्रंप ने इस संस्था को वैश्विक संघर्षों के समाधान के लिए एक मंच के रूप में पेश किया है. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने हस्ताक्षर समारोह के दौरान घोषणा की कि चार्टर लागू हो चुका है और ‘बोर्ड ऑफ पीस’ अब आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय संगठन बन गया है.
इस पहल में शामिल होने के लिए जिन देशों ने ट्रंप के आमंत्रण को स्वीकार किया है, उनमें अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अज़रबैजान, बहरीन, बेलारूस, मिस्र, हंगरी, कज़ाख़स्तान, मोरक्को, पाकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात और वियतनाम शामिल हैं. वहीं चीन, जर्मनी, इटली, पैराग्वे, रूस, स्लोवेनिया, तुर्किये और यूक्रेन जैसे कई देशों ने अभी इस प्रस्ताव पर कोई साफ रुख नहीं अपनाया है.
छह साल बाद पहली बार विश्व आर्थिक मंच में हिस्सा लेते हुए ट्रंप ने अपने संबोधन में अमेरिका को दुनिया की “आर्थिक इंजन” बताया और यूरोप की नीतियों की तीखी आलोचना की. उन्होंने कहा कि यूरोप सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा है. अपने भाषण में ट्रंप का ग्रीनलैंड पर नियंत्रण पाने का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया, जिसे उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ज़रूरी बताया. ट्रंप ने कहा कि इतनी विशाल बर्फीली भूमि की सुरक्षा केवल अमेरिका ही कर सकता है.
इससे पहले दिन में भारत के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने डावोस में कहा कि बड़े पैमाने पर लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) विकसित करना अपने आप में किसी देश को भू-राजनीतिक बढ़त नहीं देता. उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) में हो रहे भारी निवेश का वास्तविक लाभ उन देशों को मिलेगा, जो इन तकनीकों का व्यावसायिक और प्रभावी उपयोग कर पाएंगे.
‘बोर्ड ऑफ पीस’ के शुभारंभ समारोह के दौरान ट्रंप ने ग़ज़ा को लेकर भी बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि ग़ज़ा को पूरी तरह असैन्य (डिमिलिटराइज़) किया जाएगा और उसका पुनर्निर्माण किया जाएगा, ताकि वह एक बार फिर रहने लायक और सुंदर क्षेत्र बन सके.
इसके अलावा, ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित बातचीत के संकेत भी दिए. उन्होंने कहा कि ईरान अमेरिका से बातचीत करना चाहता है और वाशिंगटन इसके लिए तैयार है. ट्रंप ने याद दिलाया कि पिछले वर्ष अमेरिका ने ईरान के यूरेनियम संवर्धन ठिकानों पर कार्रवाई की थी, ताकि तेहरान परमाणु हथियार न बना सके. उन्होंने दोहराया कि ऐसा होने नहीं दिया जाएगा, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि बातचीत के दरवाज़े खुले हैं.
डावोस में ट्रंप के इन बयानों और नई पहल ने वैश्विक राजनीति में अमेरिका की सक्रिय भूमिका को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है, वहीं ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं.
Source: News Agencies
