By: The Trek News Desk
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जापान में होने वाले अचानक घोषित आम चुनाव से पहले प्रधानमंत्री साने ताकाइची को खुला समर्थन दिया है. ट्रंप ने गुरुवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ताकाइची एक “मज़बूत, प्रभावशाली और समझदार नेता” हैं, जो अपने देश से सच्चा प्रेम करती हैं.
उन्होंने लिखा, “उन्होंने पहले ही साबित कर दिया है कि वह जापान को सही दिशा में ले जा सकती हैं. वह जापान की जनता को निराश नहीं करेंगी.”
अमेरिकी राष्ट्रपतियों द्वारा विदेशी चुनावों में किसी उम्मीदवार का समर्थन करना आम बात नहीं है, लेकिन ट्रंप इससे पहले भी ऐसा कर चुके हैं. हाल ही में उन्होंने अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली और हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बान का समर्थन किया था.
प्रधानमंत्री ताकाइची ने ट्रंप के साथ अपने रिश्तों को मज़बूत करने पर खास ध्यान दिया है. इसका उद्देश्य अमेरिका के साथ रिश्तों में स्थिरता लाना है, खासकर उस वक्त जब ट्रंप प्रशासन ने जापान पर भारी टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी.
शुरुआत में ट्रंप ने जापानी उत्पादों पर 25% शुल्क लगाने की धमकी दी थी, लेकिन जुलाई में दोनों देशों के बीच एक समझौता हुआ. इसके तहत जापान ने अमेरिका में 550 अरब डॉलर के निवेश पर सहमति जताई, जिसके बदले आयात शुल्क घटाकर 15% कर दिया गया.

64 वर्षीय साने ताकाइची अक्टूबर में अपनी पार्टी का नेतृत्व चुनाव जीतने के बाद प्रधानमंत्री बनी थीं और संसद में बहुमत हासिल किया था. हालांकि, उन्होंने पिछले महीने जनता से सीधा जनादेश लेने के लिए अचानक चुनाव कराने का फैसला किया.
प्रधानमंत्री बनने के सिर्फ एक हफ्ते बाद ही उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप की मेज़बानी की. टोक्यो के अकासाका पैलेस में उन्हें पूरे सैन्य सम्मान के साथ स्वागत दिया गया, जिसे उनकी कूटनीतिक शुरुआत के तौर पर देखा गया.
ताकाइची और ट्रंप दोनों इस बात पर सहमत हैं कि जापान को अपनी रक्षा क्षमताओं पर अधिक खर्च करना चाहिए. जैसे-जैसे क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं, जापान में भी यह भावना मज़बूत हो रही है कि उसे अपनी सुरक्षा के लिए ज़्यादा निवेश करना होगा.
दोनों नेताओं ने एक-दूसरे की खुले तौर पर तारीफ की और दुर्लभ खनिजों (रेयर अर्थ) से जुड़े समझौते पर हस्ताक्षर किए. इसके अलावा, अमेरिका-जापान संबंधों को एक नए “स्वर्ण युग” में ले जाने की घोषणा भी की गई.
ट्रंप का यह समर्थन सिर्फ जापानी मतदाताओं के लिए नहीं, बल्कि पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र, खासकर चीन के लिए भी एक संकेत माना जा रहा है. बीजिंग और टोक्यो के रिश्ते इस समय बेहद तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं.

पिछले साल नवंबर में ताकाइची के उस बयान पर चीन ने कड़ा विरोध जताया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर चीन ताइवान पर हमला करता है तो जापान आत्मरक्षा में कदम उठा सकता है. ताकाइची ने अब तक इस बयान को वापस लेने से इनकार किया है.
यह समर्थन ऐसे समय आया है जब ट्रंप ने हाल ही में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से फोन पर बातचीत की थी. ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते “बेहद अच्छे” हैं और इन्हें बनाए रखना ज़रूरी है.
हालिया सर्वेक्षणों में ताकाइची की पार्टी को बड़ी जीत मिलने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन रविवार का चुनाव जीतना उनकी राह की पहली चुनौती भर होगा.
उनकी असली परीक्षा जापान की सुस्त अर्थव्यवस्था को संभालने, अमेरिका के साथ सुरक्षा सहयोग को संतुलित रखने और चीन जैसे बड़े व्यापारिक साझेदार के साथ नाजुक रिश्तों को संतुलित करने में होगी.
Source: News Agencies
