By: The Trek News Desk
मशहूर गायक ज़ुबीन गर्ग की मौत के मामले में गिरफ्तार पांच आरोपियों को जेल ले जाते समय असम के बकसा ज़िले में हालात अचानक बेकाबू हो गए. बुधवार दोपहर जैसे ही पुलिस का काफिला आरोपियों को लेकर बकसा जिला जेल पहुंचा, भीड़ ने उस पर पत्थरबाज़ी शुरू कर दी, जिसके बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया.
पुलिस ने हालात को काबू में लाने के लिए आंसू गैस के गोले और रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया, लेकिन तब तक तीन पुलिस वाहन आग के हवाले किए जा चुके थे. इनमें आईजीपी की सरकारी गाड़ी भी शामिल थी.
भीड़ ने जेल परिसर को घेरा, इंटरनेट सेवा पर रोक
जैसे ही आरोपियों का काफिला बकसा जेल परिसर में दाखिल हुआ, सैकड़ों लोग वहां इकट्ठा हो गए और जेल को चारों ओर से घेरने की कोशिश की. भीड़ ने हिंसक रूप इख्तियार कर लिया और पत्थरबाज़ी शुरू कर दी, जिससे सुरक्षाबलों को तत्काल कार्रवाई करनी पड़ी.
असम पुलिस के कानून एवं व्यवस्था के आईजीपी अखिलेश कुमार सिंह ने बताया, “शाम 6:45 बजे तक स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में थी. हालांकि घटना लगभग दो-तीन किलोमीटर क्षेत्र में फैली थी, इसलिए अब भी स्थिति का पूरा मूल्यांकन किया जा रहा है.”
पांच से अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक, इंटरनेट बंद
बुधवार शाम को बकसा जिला प्रशासन ने जिले के मुख्यालय मुसलपुर और जेल के आसपास के क्षेत्रों में धारा 144 लागू कर दी, जिससे पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. इसके साथ ही गृह एवं राजनीतिक विभाग ने बकसा जिले में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को अगले आदेश तक बंद करने का आदेश जारी किया.
सरकारी आदेश में कहा गया कि “सोशल मीडिया के माध्यम से भड़काऊ संदेश, अफवाहें फैलने की आशंका है, जिससे हालात और बिगड़ सकते हैं.”

कौन हैं आरोपी?
पुलिस द्वारा जेल ले जाए गए पांच आरोपियों में दो मुख्य आरोपी हैं-
- श्यामकानु महंता, जो नॉर्थईस्ट इंडिया फेस्टिवल के आयोजक हैं
- और सिद्धार्थ शर्मा, जो ज़ुबीन गर्ग के मैनेजर रहे हैं.
इन दोनों को 1 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था.
इसके अलावा,
- ज़ुबीन गर्ग के चचेरे भाई और असम पुलिस सेवा के अधिकारी संदीपन गर्ग, जो सिंगापुर यात्रा के दौरान उनके साथ थे,
- और दो निजी सुरक्षा अधिकारी, नंदेश्वर बोरा और परेश बैश्य, को भी बाद में गिरफ्तार किया गया.
इन सभी को पहले पुलिस हिरासत में भेजा गया था, जहाँ विशेष जांच टीम (SIT) द्वारा पूछताछ की गई. बुधवार को उनकी हिरासत समाप्त होने पर उन्हें अदालत में पेश किया गया, जिसके बाद बकसा की नई जिला जेल में स्थानांतरित कर दिया गया, यह जेल इस साल जून में ही उद्घाटित हुई थी और अभी तक कोई अन्य कैदी वहां नहीं है.
सरकार पर दबाव, जनता में गुस्सा
ज़ुबीन गर्ग की मौत के बाद से ही पूरे असम में जनता के बीच जबरदस्त गुस्सा देखा गया है. अब जब आरोपियों को जेल में स्थानांतरित किया गया, जनता ने अपनी नाराज़गी हिंसक रूप में ज़ाहिर की.
प्रशासन फिलहाल अलर्ट पर है, और आने वाले दिनों में सुरक्षा और डिजिटल निगरानी बढ़ाने के संकेत दिए गए हैं. इस बीच, ज़ुबीन के प्रशंसक न्याय की मांग पर अडिग हैं और असम में यह मामला राजनीतिक और सामाजिक रूप से केंद्र में बना हुआ है.
Source: News Agencies
