By: प्रेरणा भारती
मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में प्रशासनिक इतिहास का सबसे बड़ा फेरबदल, सालों से एक ही विभाग, एक ही कुर्सी पर जमें 22 कर्मचारियों को एक झटके में हटा दिया गया. यह कार्रवाई छात्रों की लगातार शिकायतों और राजभवन के कड़े निर्देश के बाद की गई है.
राजभवन ने लगाई मुहर, कुलपति पर दबाव
छात्र नेता विनीत चपराना ने विश्वविद्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार, सुस्ती और मनमानी के खिलाफ सीधे राजभवन में शिकायत दर्ज कराई थी. उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के कार्यालय ने तुरंत संज्ञान लिया और विश्वविद्यालय प्रशासन को तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई के सख्त निर्देश दिए. इसके बाद कुलपति ने बिना देरी किए 22 कर्मचारियों के स्थानांतरण आदेश जारी कर दिए.
10 से 21 साल तक एक ही पद पर जमे थे कर्मचारी
सूत्रों के अनुसार, स्थानांतरित कर्मचारी निम्नलिखित प्रमुख विभागों में कार्यरत थे:
– मानव संसाधन विभाग
– गोपनीय शाखा
– परीक्षा नियंत्रक कार्यालय
– समिति सेल
– छात्र सहायता केंद्र
– रजिस्ट्रार कार्यालय की संवेदनशील शाखाएँ
इनमें से कई कर्मचारी दो दशक से अधिक समय तक एक ही जगह पर थे, जिससे छात्रों को परीक्षा परिणाम, डिग्री, छात्रवृत्ति और अन्य सेवाओं में भारी परेशानी हो रही थी.

छात्रों में खुशी की लहर, प्रशासन में हड़कंप
विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों ने इस कदम का ज़ोरदार स्वागत किया. छात्र नेता विनीत चपराना ने कहा, “यह सिर्फ स्थानांतरण नहीं, विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार और सुस्ती के खिलाफ पहली जीत है. अब पारदर्शिता आएगी, जवाबदेही आएगी और छात्रों का काम बिना रिश्वत और देरी के होगा.”
क्या है आगे की योजना?
प्रशासन सूत्र बता रहे हैं कि यह सिर्फ शुरुआत है, जल्द ही:
– सभी विभागों में रोटेशन पॉलिसी लागू होगी.
– डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम शुरू किया जाएगा.
– शिकायत निवारण सेल को मजबूत किया जाएगा.
विश्वविद्यालय की छवि सुधारने की कोशिश
लंबे समय से आलोचनाओं के घेरे में रहे CCS विश्वविद्यालय के लिए यह कदम उसकी साख़ बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. अब नज़र इस बात पर है कि क्या नए स्थानांतरित कर्मचारी पुरानी जगहों पर पुरानी गलतियाँ दोहराएंगे या वाक़ई सुधार का नया दौर शुरू हो गया है.
